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उत्तर प्रदेश की तीन विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की तारीख का इंतजार जारी

उत्तर प्रदेश की तीन विधानसभा सीटों—घोसी, दुद्धी और फरीदपुर—पर उपचुनाव की तारीखों की घोषणा का इंतजार जारी है। इन सीटों पर विधायकों के निधन के बाद से चुनाव प्रक्रिया में देरी हो रही है। राजनीतिक हलकों में घोसी सीट पर सबसे अधिक चर्चा हो रही है, क्योंकि इसे खाली हुए छह महीने हो चुके हैं। जानें इस मामले में चुनाव आयोग की स्थिति और कानूनी प्रावधान क्या हैं।
 

उपचुनाव की तारीखों का सस्पेंस

उत्तर प्रदेश की तीन विधानसभा सीटों—घोसी, दुद्धी और फरीदपुर—पर होने वाले उपचुनाव को लेकर स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं है। ये सीटें अपने-अपने विधायकों के निधन के कारण खाली हैं, लेकिन चुनाव आयोग ने अब तक उपचुनाव की तारीखों की घोषणा नहीं की है। विशेष रूप से घोसी सीट पर चर्चा अधिक हो रही है, क्योंकि इसे खाली हुए छह महीने हो चुके हैं।


चुनाव आयोग की चुप्पी

आमतौर पर, किसी विधानसभा सीट के खाली होने पर छह महीने के भीतर उपचुनाव कराना अनिवार्य होता है। इस देरी ने राजनीतिक दलों और स्थानीय नेताओं के बीच अटकलों को बढ़ा दिया है। चुनाव आयोग की ओर से इस मामले में कोई स्पष्ट संकेत नहीं आया है।


सचिवालय की जानकारी

घोसी, दुद्धी और फरीदपुर सीटों पर उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू करने के लिए विधानसभा सचिवालय ने चुनाव आयोग को सूचित किया था। घोसी सीट समाजवादी पार्टी के विधायक सुधाकर सिंह के निधन के बाद रिक्त हुई थी। वहीं, फरीदपुर सीट से बीजेपी विधायक प्रोफेसर श्याम बिहारी लाल और दुद्धी से समाजवादी पार्टी के विधायक विजय सिंह का निधन जनवरी 2026 में हुआ था।


घोसी पर विशेष ध्यान

घोसी विधानसभा सीट पर सबसे अधिक ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। अगले हफ्ते इस सीट के खाली होने के छह महीने पूरे हो जाएंगे, लेकिन चुनाव आयोग ने अब तक कोई अधिसूचना जारी नहीं की है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि सामान्य परिस्थितियों में उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू हो जानी चाहिए थी।


वोटर लिस्ट की पुनरीक्षण प्रक्रिया

सूत्रों के अनुसार, उपचुनाव में देरी का एक कारण वोटर लिस्ट का विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) हो सकता है। यह प्रक्रिया अक्टूबर के अंत में शुरू हुई थी और इसे दो बार बढ़ाया गया। हालांकि, चुनाव आयोग ने 10 अप्रैल को फाइनल वोटर लिस्ट जारी की थी, लेकिन इसके बाद भी उपचुनाव की कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है।


कानूनी प्रावधान

उपचुनाव कराने के नियम जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 150 और 151A में दिए गए हैं। धारा 150 के अनुसार, किसी विधानसभा सीट के रिक्त होने पर चुनाव आयोग को अधिसूचना जारी करनी होती है। धारा 151A के अनुसार, आमतौर पर छह महीने के भीतर उपचुनाव कराना आवश्यक है।


विधानसभा का कार्यकाल

उत्तर प्रदेश विधानसभा का कार्यकाल 22 मई 2027 तक है। ऐसे में चुनावी नियमों के अनुसार रिक्त सीटों पर उपचुनाव कराना आवश्यक है। फरीदपुर और दुद्धी सीटें लगभग चार महीने से रिक्त हैं, जबकि घोसी सीट छह महीने से अधिक समय से खाली है।


चुनाव आयोग की स्थिति

राजनीतिक विश्लेषक राजेंद्र कुमार का कहना है कि चुनाव आयोग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि उपचुनाव क्यों नहीं कराए जा रहे हैं। यदि ऐसा नहीं किया गया, तो आयोग पर आरोप लग सकते हैं और लोगों का विश्वास भी उठ सकता है। चुनाव आयोग की ओर से अब तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।