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उच्चतम न्यायालय ने सीएए विरोधी भाषणों पर पुनर्विचार याचिका खारिज की

उच्चतम न्यायालय ने 2020 में दिल्ली में सीएए विरोधी प्रदर्शनों के दौरान भाजपा नेताओं के कथित नफरती भाषणों पर पुनर्विचार याचिका को खारिज कर दिया है। न्यायालय ने कहा कि इन भाषणों से कोई संज्ञेय अपराध नहीं बनता। माकपा नेताओं ने इस निर्णय को चुनौती दी थी, लेकिन न्यायालय ने स्पष्ट किया कि भाषण किसी विशेष समुदाय के खिलाफ नहीं थे और न ही इससे कोई हिंसा भड़की। जानें इस महत्वपूर्ण निर्णय के सभी पहलुओं के बारे में।
 

उच्चतम न्यायालय का निर्णय

नई दिल्ली, तीन अगस्त: उच्चतम न्यायालय ने अपने पूर्व निर्णय की समीक्षा करने से मना कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि 2020 में दिल्ली में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के खिलाफ प्रदर्शनों के दौरान भाजपा नेताओं अनुराग ठाकुर और प्रवेश वर्मा के कथित नफरती भाषणों से कोई संज्ञेय अपराध नहीं बनता। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के नेता वृंदा करात और के.एम. तिवारी द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें शीर्ष अदालत के 29 अप्रैल के फैसले पर पुनर्विचार की मांग की गई थी। पीठ ने कहा, 'हमने पुनर्विचार याचिका और उसके समर्थन में दिए गए तर्कों का अवलोकन किया है।'


पीठ ने आगे कहा, 'हमें उस आदेश में कोई स्पष्ट त्रुटि नहीं मिली है, जिसके आधार पर पुनर्विचार किया जा सके।' यह आदेश 29 जुलाई को जारी किया गया था, लेकिन हाल ही में न्यायालय की वेबसाइट पर अपलोड किया गया। न्यायालय ने 29 अप्रैल को कहा था कि ठाकुर और वर्मा के खिलाफ कोई संज्ञेय अपराध नहीं बनता। ठाकुर पूर्व केंद्रीय मंत्री हैं, जबकि वर्मा दिल्ली सरकार में मंत्री हैं।


माकपा नेताओं ने इस मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय के जून 2022 के निर्णय को चुनौती दी थी। उच्च न्यायालय ने करात और तिवारी की याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें दिल्ली के शाहीन बाग में सीएए-विरोधी प्रदर्शनों के दौरान ठाकुर और वर्मा के कथित नफरती भाषणों के लिए प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने से निचली अदालत के इनकार को चुनौती दी गई थी। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि उच्च न्यायालय ने स्वतंत्र रूप से जांच के बाद यह निष्कर्ष निकाला था कि भाषणों से कोई संज्ञेय अपराध नहीं बनता।


इसके साथ ही, शीर्ष अदालत ने यह भी कहा कि ये बयान किसी विशेष समुदाय के खिलाफ नहीं थे और न ही इनसे हिंसा या अव्यवस्था फैली। माकपा नेताओं ने आरोप लगाया था कि 27 जनवरी 2020 को ठाकुर ने रिठाला में एक रैली में नफरत फैलाने वाला भाषण दिया था, जबकि वर्मा ने 28 जनवरी 2020 को भड़काऊ भाषण दिए थे।