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उच्चतम न्यायालय ने शब्बीर अहमद शाह के मामले में NIA को लगाई फटकार

उच्चतम न्यायालय ने कश्मीरी अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को कड़ी फटकार लगाई है। अदालत ने एजेंसी से पूछा कि शाह को छह साल से अधिक समय तक हिरासत में रखने का क्या आधार है। सुनवाई के दौरान, न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता ने NIA की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई और कहा कि ठोस तथ्य पेश करने की आवश्यकता है। शाह के वकील ने उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों का खंडन किया और कहा कि उन्हें जनता का समर्थन प्राप्त है। इस मामले में आगे की सुनवाई 10 फरवरी को होगी।
 

उच्चतम न्यायालय का सख्त रुख

उच्चतम न्यायालय ने कश्मीरी अलगाववादी नेता शब्बीर अहमद शाह से जुड़े आतंकवाद वित्त पोषण मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के प्रति कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने मंगलवार को कहा कि NIA ने अपना पक्ष सही तरीके से प्रस्तुत नहीं किया और यह भी पूछा कि शाह को छह साल से अधिक समय तक हिरासत में रखने का क्या आधार है।


सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण टिप्पणियां

NIA को फटकार: अदालत ने NIA की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि एजेंसी ने अपने तर्क स्पष्ट रूप से नहीं रखे।


हिरासत पर सवाल: जस्टिस की बेंच ने संघीय एजेंसी से पूछा कि शब्बीर अहमद शाह को इतनी लंबी अवधि तक हिरासत में रखने का ठोस आधार क्या है।


पक्ष रखने में कमी: अदालत ने यह भी कहा कि NIA ने मामले की गंभीरता और हिरासत की आवश्यकता को कानूनी रूप से साबित करने में कमी दिखाई है।


जमानत अर्जी पर सुनवाई

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने NIA को निर्देश दिया कि वे शाह के कुछ भाषण और अन्य प्रासंगिक तथ्य पेश करें। न्यायमूर्ति मेहता ने कहा, "हमें ऐसे लोगों के प्रति सहानुभूति नहीं है जो इस तरह की गतिविधियों में शामिल रहे हों, लेकिन हिरासत के लिए ठोस तथ्य होने चाहिए।"


लूथरा ने कहा कि उन्हें कुछ दस्तावेज पेश करने के लिए समय चाहिए, क्योंकि वे एनआईए का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।


शाह का बचाव

शाह की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंजाल्वेज ने कहा कि उनके मुवक्किल ने कभी पत्थरबाजी नहीं की और उन्होंने कश्मीर मुद्दे को सुलझाने के लिए भारत के पांच प्रधानमंत्रियों के साथ बैठक की।


गोंजाल्वेज ने कहा, "शाह को जनता का प्यार इसलिए है क्योंकि वह घाटी के लोगों की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं।"


एनआईए की दलीलें

एनआईए की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने कहा कि शाह के 39 साल सलाखों के पीछे बिताने के दावे की पुष्टि नहीं होती। उन्होंने कहा कि शाह की हिरासत की अवधि लगभग पांच साल दो महीने है।


पीठ ने एनआईए को फटकार लगाते हुए कहा कि उसे शाह की हिरासत को उचित ठहराना चाहिए।


मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला 2017 में दर्ज किया गया था, जिसमें शब्बीर अहमद शाह पर आरोप है कि वे कश्मीर में अशांति फैलाने के लिए विदेशों से फंड ले रहे थे। एनआईए और प्रवर्तन निदेशालय ने उन पर मनी लॉन्ड्रिंग और गैर-कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम के तहत मामले दर्ज किए हैं।


शब्बीर अहमद शाह का परिचय

शब्बीर अहमद शाह 'डेमोक्रेटिक फ्रीडम पार्टी' के संस्थापक हैं और उन्हें कश्मीर के अलगाववादी राजनीति का एक प्रमुख चेहरा माना जाता है।


उनके समर्थक उन्हें 'नेल्सन मंडेला' कहते हैं, जबकि सुरक्षा एजेंसियां उन्हें भारत विरोधी गतिविधियों का मुख्य सूत्रधार मानती हैं।


आगे की प्रक्रिया

अब NIA को अदालत में एक विस्तृत हलफनामा पेश करना होगा जिसमें उन्हें यह बताना होगा कि अब तक की जांच में क्या ठोस सबूत मिले हैं और ट्रायल खत्म होने में कितना समय लगेगा।