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उच्चतम न्यायालय ने कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की याचिका पर सुनवाई की सहमति दी

उच्चतम न्यायालय ने मध्यप्रदेश के कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दी है। उन्होंने दिल्ली उच्च न्यायालय के उस निर्णय को चुनौती दी है, जिसमें उनकी दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इनकार किया गया था। यह मामला अवैध ब्याज भुगतान से संबंधित है। निचली अदालत ने उन्हें तीन साल की सजा सुनाई थी, जिसके खिलाफ उन्होंने अपील की थी। निर्वाचन आयोग ने उनके निर्वाचन क्षेत्र दतिया के लिए उपचुनाव की अधिसूचना जारी की है।
 

उच्चतम न्यायालय की सुनवाई

नई दिल्ली, 29 जुलाई: उच्चतम न्यायालय ने मध्यप्रदेश के कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति प्रदान की है। इस याचिका में उन्होंने दिल्ली उच्च न्यायालय के उस निर्णय को चुनौती दी है, जिसमें उनकी दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इनकार किया गया था। यह मामला 1998 से 2011 के बीच अवैध ब्याज प्राप्त करने के लिए बैंक के रिकॉर्ड में हेराफेरी से संबंधित है।


निचली अदालत का फैसला

निचली अदालत ने 2 अप्रैल को भारती को जिला सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक के पूर्व अध्यक्ष के रूप में तीन साल की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ अपील करने के बाद, उच्च न्यायालय ने 28 अप्रैल को उनकी सजा पर रोक लगा दी थी। हालांकि, 10 जुलाई को उच्च न्यायालय ने उनकी दोषसिद्धि पर रोक लगाने से मना कर दिया।


निर्वाचन आयोग की कार्रवाई

दोषसिद्धि के बाद, भारती को राज्य विधानसभा की सदस्यता से अयोग्य घोषित कर दिया गया। निर्वाचन आयोग ने उनके निर्वाचन क्षेत्र दतिया के लिए 30 जुलाई को उपचुनाव कराने की अधिसूचना जारी की है। नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 13 जुलाई थी।


याचिका की सुनवाई

भारती की याचिका, जो उच्च न्यायालय के 10 जुलाई के आदेश को चुनौती देती है, बुधवार को न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ के समक्ष आई। पीठ ने मामले की सुनवाई के लिए सहमति दी और प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया। पीठ ने कहा कि याचिका को चार सप्ताह बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाएगा।


अभियोजन पक्ष का आरोप

निचली अदालत ने 1 अप्रैल को भारती को भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धाराओं 120बी (आपराधिक साजिश), 420 (धोखाधड़ी), 467 (मूल्यवान प्रतिभूति की जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी) और 471 (जाली दस्तावेज को असली के रूप में इस्तेमाल करना) के तहत दोषी ठहराया था। इस मामले को शीर्ष अदालत ने पिछले साल अक्टूबर में दिल्ली स्थानांतरित किया था, जो बचाव पक्ष के गवाहों को डराने-धमकाने के प्रयासों के दावे के मद्देनजर किया गया था।


मामले की पृष्ठभूमि

अभियोजन पक्ष के अनुसार, भारती की दिवंगत मां सावित्री ने 24 अगस्त 1998 को दतिया स्थित जिला सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक में परिवार द्वारा संचालित ट्रस्ट के नाम पर 10 लाख रुपये की तीन साल की सावधि जमा (एफडी) की थी। इस जमा पर 13.5 प्रतिशत की ब्याज दर निर्धारित की गई थी। अभियोजन ने कहा कि आरोपियों ने बैंक रिकॉर्ड में छेड़छाड़ कर ऊंची ब्याज दर का भुगतान जारी रखने के लिए साजिश की थी।