×

उच्चतम न्यायालय ने अरुणाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग के सदस्य का निलंबन रद्द किया

उच्चतम न्यायालय ने अरुणाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग की सदस्य मेपुंग तादर बागे का निलंबन रद्द कर दिया है। न्यायालय ने कहा कि उनके खिलाफ कदाचार के आरोप सिद्ध नहीं हुए हैं। इस निर्णय ने आयोग के सदस्यों के आचरण के मानकों को लेकर महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और न्यायालय के निर्णय के पीछे के तर्क।
 

उच्चतम न्यायालय का निर्णय

उच्चतम न्यायालय ने परीक्षा पत्र लीक मामले में अरुणाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग (एपीपीएससी) की एक सदस्य के खिलाफ कदाचार के आरोपों को खारिज करते हुए बृहस्पतिवार को उसके निलंबन को तुरंत रद्द करने का आदेश दिया।


न्यायमूर्ति जेके माहेश्वरी और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार की पीठ ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 317(1) के संदर्भ में यह निर्णय लिया, जो लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या सदस्यों को हटाने और निलंबित करने से संबंधित है। पीठ ने कहा कि एपीपीएससी की सदस्य मेपुंग तादर बागे के खिलाफ कोई ठोस आरोप साबित नहीं हो सके हैं।


पीठ ने स्पष्ट किया कि प्रतिवादी के खिलाफ लगाए गए आरोप कदाचार की श्रेणी में नहीं आते हैं और न ही ये किसी प्रकार की चूक के दायरे में आते हैं, जिसकी गंभीरता अपेक्षाकृत कम होती है। यह मामला ऐसा नहीं है, जहां प्रतिवादी ने आयोग के सदस्य के रूप में अपेक्षित आचरण के मानकों का उल्लंघन किया हो।


पीठ ने कहा, "इन तथ्यों के आलोक में, यह स्पष्ट है कि आरोप सिद्ध नहीं हुए हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने नियम 2013 के आदेश 43 के नियम 5 के अनुसार और भारत के संविधान के अनुच्छेद 317(1) के तहत राष्ट्रपति को रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया है, जिसमें कहा गया है कि मेपुंग तादर बागे द्वारा कदाचार का कोई कृत्य सिद्ध नहीं होता है।"