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उच्चतम न्यायालय का दिव्यांग व्यक्तियों के अधिकारों को सशक्त बनाने का आदेश

उच्चतम न्यायालय ने दिव्यांग व्यक्तियों के लिए सुविधाओं और पहुंच में सुधार के लिए केंद्र सरकार को महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। न्यायालय ने विशेषज्ञों के सुझावों पर विचार करने की आवश्यकता पर जोर दिया है, ताकि दिव्यांगजनों को सार्वजनिक स्थानों और सेवाओं तक बेहतर पहुंच मिल सके। इसके अलावा, न्यायालय ने राज्य आयुक्तों की नियुक्ति और मुख्य आयुक्त की नियुक्ति पर भी कड़ा रुख अपनाया है। जानें इस आदेश के पीछे की पूरी कहानी और इसके संभावित प्रभाव।
 

उच्चतम न्यायालय का महत्वपूर्ण आदेश

नई दिल्ली, 29 जुलाई: उच्चतम न्यायालय ने दिव्यांग व्यक्तियों के लिए सुविधाओं और पहुंच में सुधार के लिए एक महत्वपूर्ण आदेश जारी किया है। न्यायालय ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह विशेषज्ञों और याचिकाकर्ताओं के सुझावों पर गहराई से विचार करे, ताकि एक मजबूत और त्रुटिरहित नियमावली तैयार की जा सके। यह नियमावली दिव्यांगजनों को सार्वजनिक स्थानों और सेवाओं तक आसानी से पहुंच प्रदान करेगी। न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने केंद्र को आठ नवंबर, 2024 तक दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम (आरपीडब्ल्यूडी), 2016 की धारा 40 के तहत आवश्यक नियम बनाने का निर्देश दिया है।


नियमों के मसौदे पर सुझाव

पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता के वकील ने सुझाव दिया कि मसौदा नियमों को अंतिम रूप देने से पहले उनके सुझावों पर विचार किया जाए, ताकि कोई कमी न रह जाए और आरपीडब्ल्यूडी अधिनियम के प्रावधान अधिक प्रभावी बन सकें। उच्चतम न्यायालय ने यह भी नोट किया कि दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, अंडमान और निकोबार तथा तमिलनाडु सहित 11 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने आरपीडब्ल्यूडी अधिनियम के तहत अनिवार्य राज्य आयुक्तों की नियुक्ति नहीं की है। पीठ ने सभी राज्यों को निर्देश दिया कि वे चार सप्ताह के भीतर राज्य आयुक्तों की नियुक्ति करें।


मुख्य आयुक्त की नियुक्ति पर कड़ा रुख

पीठ ने केंद्र सरकार द्वारा आरपीडब्ल्यूडी अधिनियम के तहत अनिवार्य मुख्य आयुक्त की नियुक्ति नहीं किए जाने पर भी कड़ा रुख अपनाया। मुख्य आयुक्त दिव्यांग व्यक्तियों के पुनर्वास की निगरानी के लिए जिम्मेदार होता है। पीठ ने केंद्र को निर्देश दिया कि वह मुख्य आयुक्त की सहायता के लिए दो आयुक्तों की नियुक्ति भी चार सप्ताह के भीतर करे।


जनहित याचिका की सुनवाई

राजीव रतूड़ी द्वारा 2025 में दायर जनहित याचिका को अगले साल जनवरी में सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है। पीठ ने केंद्र सरकार और अन्य पक्षों से अनुपालन हलफनामे दाखिल करने को कहा है। इससे पहले, 2024 में उच्चतम न्यायालय ने दिव्यांग व्यक्तियों के लिए सार्वजनिक स्थानों तक पहुंच को बेहतर बनाने के लिए केंद्र को तीन महीने के भीतर अनिवार्य सुगम्यता मानकों को लागू करने का निर्देश दिया था।


प्रगति की रिपोर्ट की मांग

पीठ ने दिव्यांग व्यक्तियों के लिए सार्वजनिक स्थानों तक सार्थक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए दिशा-निर्देश देने के अनुरोध संबंधी जनहित याचिका पर सुनवाई स्थगित कर दी थी। इसने केंद्र सरकार से निर्देशों के कार्यान्वयन की दिशा में हुई प्रगति की रिपोर्ट देने को कहा है।