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ईरान संकट के चलते BRICS में आम सहमति की चुनौती

ईरान के युद्ध के कारण BRICS में आम सहमति स्थापित करना भारत के लिए एक गंभीर चुनौती बन गया है। इस वर्ष भारत BRICS की अध्यक्षता कर रहा है, जिसमें उसे सभी सदस्य देशों को एक साथ लाने की जिम्मेदारी निभानी है। हाल ही में हुई उच्च स्तरीय बैठक में ईरान और UAE के बीच तनाव बढ़ा है। भारत को संतुलन बनाए रखने की कोशिश में कई मुद्दों पर चर्चा करनी पड़ी, लेकिन कोई साझा बयान जारी नहीं हो सका। आगे BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक में क्या निर्णय होंगे, यह देखना दिलचस्प होगा।
 

भारत के लिए BRICS की अध्यक्षता में चुनौतियाँ

ईरान के युद्ध के कारण BRICS में आम सहमति स्थापित करना भारत के लिए एक गंभीर चुनौती बन गया है। इस वर्ष भारत इस समूह की अध्यक्षता कर रहा है, जिसमें उसे सभी सदस्य देशों को एक साथ लाने की जिम्मेदारी निभानी है। BRICS में भारत, रूस, चीन, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका के साथ-साथ ईरान और UAE जैसे कुल 11 देश शामिल हैं।


सदस्य देशों के बीच तनाव

समस्या यह है कि BRICS के कुछ सदस्य देश स्वयं पश्चिम एशिया के संघर्ष में शामिल हैं, जिससे एक साझा बयान जारी करना कठिन हो गया है। हाल ही में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में ईरान और UAE के प्रतिनिधियों के बीच तीखी बहस हुई। ईरान चाहता है कि BRICS उसके समर्थन में एक बयान जारी करे, जबकि UAE ईरान के हमलों की निंदा की मांग कर रहा है.


हालिया बैठक की जानकारी

रूस और चीन को ईरान के पक्ष में माना जा रहा है, जबकि अन्य देश संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं। भारत किसी भी पक्ष में जाने से बच रहा है, क्योंकि उसे सभी देशों के बीच संतुलन बनाए रखना है। दिल्ली में 24 अप्रैल 2026 को BRICS के डिप्टी विदेश मंत्रियों और विशेष दूतों की बैठक हुई, जिसमें मध्य पूर्व की स्थिति पर चर्चा की गई। सभी देशों ने चिंता जताई, लेकिन कोई साझा बयान जारी नहीं हो सका.


भारत का चेयर स्टेटमेंट

इस स्थिति में भारत को एक चेयर स्टेटमेंट जारी करना पड़ा, जो मेजबान देश द्वारा जारी किया जाता है, लेकिन उस पर सभी देशों की सहमति नहीं होती। चर्चा में फिलिस्तीन मुद्दा, गाजा की स्थिति, मानवीय सहायता, UNRWA की भूमिका, आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख, लेबनान में युद्धविराम, सीरिया के पुनर्निर्माण, यमन-इराक-लीबिया की राजनीतिक स्थिति और सूडान के संकट जैसे कई मुद्दे शामिल रहे.


ईरान की मांग

मार्च में ईरान ने भारत से अनुरोध किया था कि BRICS की ओर से अमेरिका और इजराइल के हमलों की निंदा वाला बयान जारी किया जाए। इससे भारत की स्थिति और जटिल हो गई, क्योंकि वह किसी एक पक्ष का खुलकर समर्थन नहीं करना चाहता.


विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी कहा कि कुछ सदस्य देश इस संघर्ष में सीधे शामिल हैं, इसलिए आम सहमति बनाना मुश्किल हो रहा है। भारत सभी देशों से बातचीत कर रहा है और समाधान निकालने की कोशिश कर रहा है.


आगामी विदेश मंत्रियों की बैठक

आगे 14-15 मई को BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक भारत में होने की संभावना है, जिसमें चीन के विदेश मंत्री वांग यी और रूस के सर्गेई लावरोव शामिल होंगे। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी हालात के अनुसार वर्चुअली जुड़ सकते हैं.