ईरान पर इजरायल की साजिश: अजरबैजान की भूमिका का खुलासा
इजरायल और अजरबैजान की साजिश
जब अमेरिका ईरान पर 40 दिनों तक हमले कर रहा था, तब इजरायल ने ईरान की भूमि पर एक गुप्त योजना बनाई थी। इस योजना में इजरायल को एक करीबी पड़ोसी, अजरबैजान, का समर्थन प्राप्त था। हाल ही में, जंग के दो महीने बाद, इस साजिश के बारे में नई जानकारी सामने आ रही है।
सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल ने अजरबैजान में कई सैन्य ठिकाने स्थापित किए थे, जिनमें से एक ईरान के तबریز शहर से केवल 60 किलोमीटर की दूरी पर था। ईरान और अजरबैजान के बीच 689 किलोमीटर की सीमा है। मीडिया रिपोर्ट्स का दावा है कि इजरायल ने इन ठिकानों से ईरान पर हमले किए और यहां से आईआरजीसी के खुफिया प्रमुख को निशाना बनाने के लिए विमान भी उड़ाए।
इजरायल की रणनीति और ईरान की प्रतिक्रिया
रिपोर्टों के अनुसार, इजरायल ने ईरान के सुप्रीम लीडर और आईआरजीसी कमांडरों की हत्या के बाद ईरान की जनता को सड़कों पर लाने की योजना बनाई थी। अजरबैजान में अपने सैनिकों को तैनात करने की तैयारी भी की गई थी, ताकि जब ईरान की जनता बगावत करे, तो इजरायल के सैनिक तुरंत कार्रवाई कर सकें।
हालांकि, ईरान की जनता ने इजरायल की इस चाल को नाकाम कर दिया। सुप्रीम लीडर आयतुल्ला अली खामिनई और सुरक्षा परिषद के प्रमुख अली लारानी की हत्या के बावजूद, ईरान की जनता ने सड़कों पर उतरने के बजाय इस्लामिक रेवोल्यूशन का समर्थन किया।
अजरबैजान की भूमिका और इजरायल के साथ संबंध
इजरायल की योजना पूरी तरह से विफल हो गई। सीएनएन के सूत्रों के अनुसार, अजरबैजान से ईरान के खिलाफ ऑपरेशन में इजरायल के कई सैनिक शामिल थे, जिनमें हेलीकॉप्टर यूनिट और मोसाद के लोग भी शामिल थे।
हालांकि, अजरबैजान ने ईरान के खिलाफ अपनी भूमि के उपयोग के आरोपों से इनकार किया है, लेकिन यह सच है कि अजरबैजान ने इजरायल के साथ मजबूत संबंध बनाए रखे हैं। अजरबैजान, जो एक मुस्लिम बहुल देश है, ने फिलिस्तीन-इजरायल विवाद पर कभी भी खुलकर कुछ नहीं कहा। इजरायल अजरबैजान को सैन्य और कृषि में सहायता करता है, और अजरबैजान अपने तेल का एक बड़ा हिस्सा इजरायल को बेचता है।
भविष्य की चुनौतियाँ
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि ईरान के नए सुप्रीम लीडर आयतुल्ला मोजतबा खामिनई अजरबैजान के इस धोखे का सामना कैसे करते हैं।