ईरान ने भारत के जहाज को रोका, अमेरिका ने सीजफायर बढ़ाने का किया ऐलान
ईरान की कार्रवाई
तेहरान/वॉशिंगटन। ईरान की इस्लामिक रेवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने होर्मुज स्ट्रेट में एक भारतीय जहाज को रोककर अपने कब्जे में ले लिया है। ईरान का आरोप है कि यह जहाज बिना अनुमति के होर्मुज से गुजरने का प्रयास कर रहा था।
जहाज की जानकारी
यह कंटेनर शिप, जिसका नाम एपामिनोडेस है और जो लाइबेरिया के झंडे तले चल रहा था, गुजरात के मुंद्रा पोर्ट की ओर बढ़ रहा था। ईरानी नौसेना के अनुसार, जहाज के नेविगेशन सिस्टम में छेड़छाड़ की गई थी, जिससे समुद्री सुरक्षा को खतरा उत्पन्न हुआ।
अन्य जहाजों पर कार्रवाई
IRGC ने इस जहाज को अपने नियंत्रण में लेकर तट की ओर ले जाने के साथ-साथ इजराइल से जुड़े एक अन्य जहाज, फ्रांसेस्का, को भी कब्जे में लिया है। इसके अलावा, यूफोरिया नामक जहाज पर भी हमला किया गया है। इससे पहले, खबरें आई थीं कि एक जहाज पर ईरान ने फायरिंग की, जबकि दूसरा ओमान के तट के पास हमले में क्षतिग्रस्त हुआ।
अमेरिका का सीजफायर बढ़ाने का निर्णय
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा है कि अमेरिका, पाकिस्तान की अपील पर ईरान के साथ चल रहे युद्धविराम को आगे बढ़ा रहा है। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि यह कितने दिनों के लिए बढ़ाया गया है।
पाकिस्तानी नेताओं की अपील
ट्रम्प ने बताया कि ईरान में इस समय नेतृत्व में एकजुटता नहीं है। ऐसे में पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ और आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने उनसे ईरान पर हमले रोकने की अपील की, ताकि ईरान को साझा प्रस्ताव तैयार करने का समय मिल सके।
सीजफायर की शर्तें
ट्रम्प ने कहा कि इस अपील को मानते हुए उन्होंने अमेरिकी सेना को फिलहाल हमले रोकने का आदेश दिया है, लेकिन सेना को पूरी तरह तैयार रहने के लिए भी कहा गया है। इस दौरान ईरान पर दबाव बनाए रखने के लिए नाकेबंदी जारी रहेगी।
ईरान को चेतावनी
ट्रम्प ने ईरान को चेतावनी दी है कि यदि शांति समझौता नहीं हुआ, तो अमेरिकी सेना हमले के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि सीजफायर को आगे नहीं बढ़ाया जाएगा।
होर्मुज स्ट्रेट पर बैठक
होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने के लिए यूके और फ्रांस ने 30 देशों की बैठक बुलाने का निर्णय लिया है, जो लंदन में आयोजित होगी।
हूती विद्रोहियों की चेतावनी
यमन के हूती विद्रोहियों ने चेतावनी दी है कि संघर्ष अभी खत्म नहीं हुआ है। अमेरिका और ईरान के बीच बना सीजफायर कमजोर है, जिससे आगे बड़ा संघर्ष होना तय है।
फ्रांस की प्रतिक्रिया
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने होर्मुज स्ट्रेट की नाकाबंदी को अमेरिका की गलती बताया है। उन्होंने कहा कि इस फैसले के बाद ईरानी अधिकारियों ने अपना रुख बदल लिया।