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ईरान ने अमेरिका के साथ सीजफायर वार्ता रोकी, इजराइल के हमलों पर उठाए सवाल

ईरान ने अमेरिका के साथ सीजफायर वार्ता को रोकने का निर्णय लिया है, जब तक लेबनान में इजराइली हमले जारी रहेंगे। तेहरान ने शांति बनाए रखने की शर्तें रखी हैं और इजराइल की सैन्य गतिविधियों को तुरंत रोकने की मांग की है। इसके अलावा, ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने के विकल्प पर भी विचार किया है। जानें इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम के बारे में और क्या हो रहा है।
 

सीजफायर वार्ता का स्थगन

वॉशिंगटन। ईरान ने अमेरिका के साथ सीजफायर वार्ता को फिलहाल रोकने का निर्णय लिया है। ईरानी समाचार एजेंसी तस्नीम के अनुसार, तेहरान ने स्पष्ट किया है कि जब तक लेबनान में इजराइली हमले जारी रहेंगे, तब तक अमेरिका के साथ किसी भी प्रकार की बातचीत नहीं होगी।


शांति की शर्तें

रिपोर्ट में बताया गया है कि ईरान का मानना है कि लेबनान में शांति बनाए रखना सीजफायर के लिए एक महत्वपूर्ण शर्त है। हालांकि, वर्तमान में लेबनान सहित कई मोर्चों पर इस समझौते का उल्लंघन हो रहा है।


इजराइल के खिलाफ कार्रवाई की मांग

ईरान ने गाजा और लेबनान में इजराइल की सैन्य गतिविधियों को तुरंत रोकने और लेबनानी क्षेत्र से इजराइली बलों की पूर्ण वापसी की मांग की है। तेहरान का कहना है कि जब तक उनकी और उनके सहयोगियों की मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक बातचीत का पुनः आरंभ नहीं होगा।


हॉर्मुज स्ट्रेट पर विचार

तस्नीम की रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि ईरान और उसके सहयोगी होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह से बंद करने और अन्य मोर्चों को सक्रिय करने के विकल्प पर विचार कर रहे हैं, जिसमें लाल सागर के दक्षिणी हिस्से में स्थित बाब अल-मंदेब स्ट्रेट भी शामिल है।


हालिया घटनाक्रम

पिछले 24 घंटों में कुछ महत्वपूर्ण घटनाएं हुई हैं।



इजराइली सेना ने दक्षिणी लेबनान में 900 साल पुराने ब्यूफोर्ट किले और उसके आस-पास की पहाड़ियों पर कब्जा कर लिया है, जो पिछले 26 वर्षों में इजराइल की लेबनान में सबसे बड़ी घुसपैठ मानी जा रही है।


फ्रांस ने लेबनान में इजराइल की बढ़ती सैन्य कार्रवाई को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाने की मांग की है।


पूर्व राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा है कि अमेरिका ने ईरानी सेना के खिलाफ उतनी सख्त कार्रवाई नहीं की है, जितनी अन्य देशों की सेनाओं के खिलाफ की गई है।


ईरान ने यह भी कहा है कि जब तक यह सुनिश्चित नहीं हो जाता कि उसके अधिकार पूरी तरह सुरक्षित हैं, तब तक अमेरिका के साथ किसी भी समझौते को मंजूरी नहीं दी जाएगी।


अमेरिका ने ईरान की ओर जा रहे एक और मालवाहक जहाज को रोका है। 17 अप्रैल से अब तक अमेरिका ने ईरान जाने वाले 6 जहाजों को रोक दिया है।