ईरान को ट्रम्प का अल्टीमेटम: युद्ध की धमकी और वैश्विक प्रतिक्रिया
ट्रम्प का ईरान को अल्टीमेटम
वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए मंगलवार तक का समय दिया है, जो आज समाप्त हो रहा है। ट्रम्प ने पहले ही चेतावनी दी थी कि यदि ईरान ने रास्ता नहीं खोला, तो उसके पावर प्लांट, पुल और अन्य महत्वपूर्ण ढांचों को निशाना बनाया जाएगा।
सोमवार रात मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, 'हमारे पास एक योजना है। हर पुल ईरान में मंगलवार रात 12 बजे तक नष्ट कर दिया जाएगा। हर पावर प्लांट काम करने के लिए अनुपयुक्त हो जाएगा।'
उन्होंने यह भी कहा, 'यह चार घंटे के भीतर हो सकता है, यदि हम चाहें। हम ऐसा नहीं चाहते, लेकिन पूरा देश एक रात में समाप्त हो सकता है।'
ट्रम्प ने ईरान को एक महत्वपूर्ण निर्णय लेने की आवश्यकता बताई। यदि ईरान अमेरिका की शर्तों को स्वीकार करता है, तो युद्ध जल्दी समाप्त हो सकता है। ट्रम्प ने इसके लिए ईरान को मंगलवार रात 8 बजे (अमेरिकी समय) तक का समय दिया है, जो भारतीय समयानुसार बुधवार सुबह 5:30 बजे है।
अमेरिकी सांसदों ने ट्रम्प की धमकी पर प्रतिक्रिया दी है। डेमोक्रेटिक सांसद क्रिस मर्फी ने कहा कि ट्रम्प का यह बयान उनके कार्यकाल का सबसे चौंकाने वाला और खतरनाक है।
मर्फी ने अपने लेख में कहा कि ट्रम्प ने ईरान को होर्मुज खोलने के लिए अल्टीमेटम देते हुए बड़े पैमाने पर युद्ध अपराध करने की धमकी दी है।
उन्होंने कहा कि ईरान के ऊर्जा प्लांट और पुलों पर हमले से हजारों निर्दोष लोग प्रभावित हो सकते हैं।
उन्होंने स्पष्ट किया, 'यह एक युद्ध अपराध होगा।' मर्फी ने ट्रम्प के सलाहकारों से अपील की कि उन्हें ऐसे कदम उठाने से रोकें और सभी को इस मुद्दे पर आवाज उठानी चाहिए।
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने कहा है कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम इस समय ईरान से आ रहे मिसाइल और ड्रोन हमलों को रोकने में सक्रिय हैं। UAE के रक्षा मंत्रालय के अनुसार, उनकी वायु रक्षा प्रणाली लगातार काम कर रही है।
ईरान ने कहा है कि वह हमलों से बातचीत कर रहा है। ईरानी नेताओं का कहना है कि उन्होंने अपने देश पर हुए हमलों को सफलतापूर्वक रोका है और वे मजबूत स्थिति में हैं।
ईरान का मानना है कि उन्हें भविष्य में इस तरह के हमलों से बचने के लिए एक स्थायी समाधान चाहिए। वे केवल सीजफायर नहीं, बल्कि युद्ध समाप्त करने की मांग कर रहे हैं।
ईरान ने लंबे समय से लगे आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने की भी मांग की है। उनका कहना है कि ये प्रतिबंध अनुचित हैं और इन्हें समाप्त किया जाना चाहिए।
लेबनान में 11 लाख से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं, जिसके बारे में संयुक्त राष्ट्र ने चिंता व्यक्त की है। यह संख्या देश की कुल आबादी का लगभग पांचवां हिस्सा है।