ईरान के साथ वार्ता में अमेरिका की असफलता, ट्रंप ने दी प्रतिक्रिया
ट्रंप का बयान
रविवार को अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान ने 'सभ्यता को खत्म करने' की धमकी के बाद वार्ता की मेज पर आने का प्रयास किया, लेकिन यह वार्ता असफल रही। उन्होंने आशा व्यक्त की कि दोनों देश फिर से बातचीत शुरू करेंगे।
फॉक्स न्यूज के कार्यक्रम 'संडे फ्यूचर्स' में ट्रंप ने कहा, 'मैं आपको बताना चाहता हूं, उस बयान ने उन्हें बातचीत की मेज पर ला खड़ा किया, और अब वे फिर से उठ चुके हैं। मेरा मानना है कि वे वापस आएंगे और हमें वह सब कुछ देंगे जो हम चाहते हैं।'
धमकी और प्रतिक्रिया
ट्रंप ने 7 अप्रैल को चेतावनी दी थी कि यदि ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को नौवहन के लिए नहीं खोला, तो अमेरिकी सेना ईरान की 'पूरी सभ्यता' को नष्ट कर देगी, जहां से विश्व का 20 प्रतिशत तेल व्यापार होता है।
उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा था, 'आज रात एक पूरी सभ्यता का अंत हो जाएगा, जिसे फिर कभी वापस नहीं लाया जा सकेगा।' इस धमकी की विश्वभर में निंदा की गई थी।
ईरान के नारे
ट्रंप ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि ईरान लगभग हर दूसरे दिन 'डेथ टू अमेरिका' के नारे लगाता है।
उन्होंने फॉक्स न्यूज से कहा, 'जब मैं किसी सभ्यता की बात करता हूं, तो वह सचमुच बदल गई है। लेकिन सोचिए, उन्हें यह कहने की इजाज़त है कि 'अमेरिका मुर्दाबाद'। जब मैं एक बयान देता हूं, तो वे कहते हैं, ऐसा भयानक बयान क्यों?'
शांति वार्ता की विफलता
अमेरिका के उपराष्ट्रपति जे डी वेंस के नेतृत्व में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को इस्लामाबाद में ईरानी वार्ताकारों के साथ शांति वार्ता की।
हालांकि, 21 घंटे तक चली यह वार्ता विफल रही, जिससे दो सप्ताह के लिए लागू युद्धविराम के भविष्य पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। दोनों पक्ष एक-दूसरे को वार्ता के विफल होने के लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
वेंस ने कहा कि ईरान परमाणु हथियार छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। समझौते पर न पहुंच पाने से वैश्विक ऊर्जा बाजार को स्थिर करने के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की संभावना धूमिल हो गई है।