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ईरान के विदेश मंत्रियों की दिल्ली यात्रा: क्या है इसके पीछे की रणनीति?

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच, ईरान के विदेश मंत्री और उप विदेश मंत्री जल्द ही दिल्ली की यात्रा करने वाले हैं। यह यात्रा ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक के संदर्भ में महत्वपूर्ण है। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशें विफल हो गई हैं, जिससे भारत की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। जानें इस यात्रा के पीछे की रणनीति और अमेरिका की चिंताएं।
 

मिडिल ईस्ट में बढ़ता तनाव

मिडिल ईस्ट में हालात बेहद गंभीर हो गए हैं। अमेरिका और ईरान आमने-सामने हैं, जबकि इजराइल लगातार हमले कर रहा है। इस बीच, एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है जिसने पाकिस्तान से लेकर वाशिंगटन तक हलचल मचा दी है। ईरान के विदेश मंत्री और उप विदेश मंत्री जल्द ही दिल्ली आने की योजना बना रहे हैं। जंग के माहौल में, तेहरान ने नई दिल्ली की ओर रुख किया है। यह सवाल उठता है कि दिल्ली में ऐसा क्या है जो पाकिस्तान के पास नहीं है? क्यों अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत पाकिस्तान में ठंडी पड़ गई है?


ब्रिक्स बैठक में ईरान की भागीदारी

रिपोर्टों के अनुसार, 14-15 मई को नई दिल्ली में होने वाली ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में ईरान के विदेश मंत्री और उप विदेश मंत्री शामिल हो सकते हैं। भारत इस समय ब्रिक्स का अध्यक्ष है और सितंबर में होने वाले बड़े ब्रिक्स समिट की तैयारी कर रहा है। मिडिल ईस्ट में हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं, और सभी की नजरें इस क्षेत्र पर हैं। अमेरिका दबाव बना रहा है, जबकि इजराइल और ईरान के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है।


पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशें

हाल के दिनों में पाकिस्तान में अमेरिका और ईरान के बीच बैक चैनल बातचीत की खबरें आई थीं। इस्लामाबाद चाहता था कि वह खुद को अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थ के रूप में पेश करे, लेकिन बातचीत आगे नहीं बढ़ी। इसी बीच, ईरान ने भारत के साथ उच्च स्तरीय संपर्क बढ़ा दिया है। यह स्थिति पाकिस्तान के लिए चिंताजनक है, क्योंकि जो भूमिका इस्लामाबाद ने अपने लिए देखी थी, वह अब दिल्ली की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है।


भारत की भूमिका और ईरान की रणनीति

ईरान ने कई बार भारत से संपर्क बनाए रखा है। विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर और ईरान के विदेश मंत्री के बीच उच्च स्तरीय बातचीत हुई है। ईरान का मानना है कि ब्रिक्स जैसे मंच वैश्विक स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। ईरान केवल सैन्य जवाब नहीं चाहता, बल्कि वह कूटनीतिक सुरक्षा भी तलाश रहा है।


बैठक में चर्चा के मुद्दे

बैठक में चर्चा के लिए कई महत्वपूर्ण मुद्दे होंगे। पहला, ब्रिक्स बनाम पश्चिमी दबाव। ईरान चाहता है कि ब्रिक्स केवल व्यापारिक मंच न रहे, बल्कि पश्चिमी दबाव के खिलाफ एक रणनीतिक समूह बने। दूसरा, चाबहार बनाम ग्वादर। चाबहार भारत को पाकिस्तान को बाईपास करके अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक पहुंचने की सुविधा देता है। तीसरा, तेल, हॉर्मोज और समुद्री सुरक्षा। हॉर्मोज स्ट्रेट दुनिया की ऊर्जा सप्लाई का महत्वपूर्ण केंद्र है।


अमेरिका की चिंता

अमेरिका इस घटनाक्रम को गंभीरता से देख रहा है क्योंकि वह जानता है कि भारत अब केवल एक क्षेत्रीय शक्ति नहीं रहा है। अगर भारत ईरान के साथ संवाद बनाए रखता है, तो तेहरान पूरी तरह से अलगथलग नहीं पड़ेगा। भविष्य में किसी भी बैक चैनल बातचीत में भारत एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।