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ईरान के मिसाइल हमलों में चीनी सेटेलाइट की भूमिका का खुलासा

हाल ही में ईरान के अमेरिकी ठिकानों पर किए गए मिसाइल हमलों में चीनी सेटेलाइट की महत्वपूर्ण भूमिका का खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने चीन से एक स्पाई सेटेलाइट खरीदी थी, जिसने हमलों की योजना बनाने में मदद की। इस सेटेलाइट ने हमले से पहले सटीक तस्वीरें भेजी थीं, जिससे ईरान को अमेरिकी ठिकानों की स्थिति का पता चला। जानें इस रिपोर्ट में और क्या जानकारी दी गई है और अमेरिका को हुए नुकसान के बारे में।
 

ईरान के हमलों का रहस्य

हाल ही में, जब ईरान ने मध्य पूर्व में अमेरिकी ठिकानों पर सटीक मिसाइल हमले किए, तो यह पूरी दुनिया के लिए चौंकाने वाला था। सवाल उठने लगे कि ईरान को इतनी सटीक जानकारी कैसे मिली। अब एक नई रिपोर्ट ने इस रहस्य को उजागर किया है। इस रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने कुछ साल पहले चीन से एक सेटेलाइट खरीदी थी। फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि ईरान ने 2024 के अंत में गुप्त रूप से एक स्पाई सेटेलाइट, TE01, खरीदी थी, जिसे चीन की एक कंपनी ने विकसित किया था। हालांकि यह एक व्यावसायिक सौदा दिखता है, लेकिन इसके पीछे की सच्चाई कुछ और है। लीक हुए दस्तावेजों के अनुसार, इस सेटेलाइट का नियंत्रण ईरान की सिविलियन स्पेस एजेंसी के पास नहीं, बल्कि सीधे आईआरजीसी के पास था। इस जानकारी के सामने आने के बाद, ईरान के हमलों में चीनी सेटेलाइट की भूमिका पर चर्चा शुरू हो गई है।


हमलों की योजना और परिणाम

मार्च 2026 में, जब ईरान ने अमेरिका के प्रिंस सुल्तान एयरबेस पर हमला किया, तो इस सेटेलाइट ने हमले से 24 घंटे पहले सटीक तस्वीरें भेजी थीं। हमले के बाद, नुकसान की जानकारी भी इसी सेटेलाइट ने दी। इसका मतलब है कि चीनी तकनीक ईरान के लिए एक महत्वपूर्ण संसाधन बन गई थी। अमेरिका पर हुए हमलों में इस सेटेलाइट की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। अमेरिका ने भी इस बात की पुष्टि की है कि उनके फाइटर जेट्स को नुकसान पहुंचा है।


अमेरिका को हुआ नुकसान

ईरान ने कई अमेरिकी विमानों को गिराने का दावा किया है, जिसमें F-15 ई स्ट्राइक ईगल और A10 थंडरबोल्ट शामिल हैं। इसके अलावा, MQ9 रिपर ड्रोन और अन्य हेलीकॉप्टरों को भी नुकसान पहुंचा है। ईरान ने यह भी कहा कि उसने एक अमेरिकी F-35 को भी गिराया। हालांकि, भारत ने इस नुकसान की पुष्टि नहीं की है। आमतौर पर युद्ध के दौरान दोनों पक्षों को नुकसान होता है, लेकिन अमेरिका को जो नुकसान हुआ, वह अपेक्षा से अधिक था।


चीनी सेटेलाइट की निगरानी

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस सेटेलाइट ने सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयरबेस की तस्वीरें ली थीं। 14 मार्च को, ट्रंप ने खुद स्वीकार किया कि इस बेस पर अमेरिकी विमानों को नुकसान हुआ था। इसके अलावा, सेटेलाइट ने जॉर्डन, बहरीन, इराक और अन्य क्षेत्रों में अमेरिकी ठिकानों की निगरानी की। यह अमेरिका की इंटेलिजेंस के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। ईरान ने इस सेटेलाइट की मदद से अमेरिकी ठिकानों पर नजर रखी और उसी के अनुसार हमलों की योजना बनाई। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।