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ईरान के बंदरगाहों पर अमेरिका की नाकाबंदी: आर्थिक प्रभाव और नुकसान

अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों की नाकाबंदी शुरू कर दी है, जिससे ईरान को प्रतिदिन 435 मिलियन डॉलर का नुकसान हो सकता है। इस नाकाबंदी का प्रभाव ईरान के निर्यात और आयात पर गंभीर होगा, जिससे देश की अर्थव्यवस्था पर भारी असर पड़ेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति ईरान के व्यापार के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकती है। जानिए इस नाकाबंदी के पीछे के कारण और इसके संभावित परिणाम।
 

अमेरिका की नाकाबंदी का आरंभ

अमेरिका ने ईरान के समुद्री बंदरगाहों की नाकाबंदी शुरू कर दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास अमेरिकी जहाजों की तैनाती की जा रही है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि कोई ईरानी जहाज नाकाबंदी के क्षेत्र में आया, तो उसे तुरंत नष्ट कर दिया जाएगा। इस नाकाबंदी के कारण ईरान को व्यापार में प्रतिदिन लगभग 435 मिलियन डॉलर का नुकसान हो सकता है, जो कि करीब 40 हजार करोड़ रुपये के बराबर है। यह नाकाबंदी अरब खाड़ी और ओमान की खाड़ी में ईरान के सभी पोर्ट्स और समुद्री क्षेत्रों में लागू होगी, लेकिन अमेरिका गैर-ईरानी बंदरगाहों की ओर जाने वाले जहाजों को नहीं रोकेगा।


आर्थिक प्रभाव का आकलन

विदेश नीति संस्थान FDD के सीनियर एक्सपर्ट मियाद मालेकी के अनुसार, ईरान पर इस नाकाबंदी का आर्थिक प्रभाव तुरंत और गंभीर हो सकता है। उन्होंने X पर एक विस्तृत पोस्ट में बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी से ईरान को निर्यात में प्रतिदिन लगभग 276 मिलियन डॉलर और आयात में 159 मिलियन डॉलर का नुकसान होगा, जिससे कुल आर्थिक नुकसान लगभग 435 मिलियन डॉलर प्रतिदिन या 13 बिलियन डॉलर प्रति माह होगा।


ईरान की व्यापार निर्भरता

ईरान का वार्षिक व्यापार, जिसका मूल्य लगभग 109.7 अरब डॉलर है, का 90% से अधिक हिस्सा फारस की खाड़ी से होकर गुजरता है। निर्यात से होने वाली आय का 80% और देश की कुल GDP का लगभग एक चौथाई हिस्सा तेल और गैस से आता है। मालेकी ने कहा कि ईरान प्रतिदिन लगभग 15 लाख बैरल कच्चा तेल निर्यात कर रहा है, जिससे युद्ध जैसी उच्च कीमतों पर प्रतिदिन लगभग 139 मिलियन डॉलर की आय होती है। नाकाबंदी के कारण यह निर्यात तुरंत बंद हो जाएगा।


पेट्रोकेमिकल और नॉन-ऑयल एक्सपोर्ट पर प्रभाव

इस नाकाबंदी से पेट्रोकेमिकल निर्यात भी प्रभावित होगा, जिससे ईरान में प्रतिदिन लगभग 54 मिलियन डॉलर का नुकसान होगा। यह सामान उन बंदरगाहों से भेजा जाता है जो नाकाबंदी के क्षेत्र में हैं। नॉन-ऑयल निर्यात पर भी प्रतिदिन लगभग 88 मिलियन डॉलर का असर पड़ेगा, क्योंकि लगभग 90% सामान खाड़ी के बंदरगाहों से होकर गुजरता है।


भविष्य की चुनौतियाँ

मालेकी ने चेतावनी दी है कि पुराने तेल क्षेत्रों को बंद करने से स्थायी नुकसान हो सकता है। उन्होंने कहा कि जबरन बंद करने से प्रतिदिन 300,000 से 500,000 बैरल उत्पादन क्षमता हमेशा के लिए समाप्त हो सकती है, जिससे सालाना 9-15 अरब डॉलर का स्थायी नुकसान हो सकता है।