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ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल का सैन्य अभियान: 42 विमानों का नुकसान

अमेरिका और इजरायल का ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' अब एक बड़ी चुनौती बन चुका है। हालिया रिपोर्ट के अनुसार, इस अभियान में अमेरिका के 42 सैन्य विमान नष्ट या क्षतिग्रस्त हुए हैं। आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है, और अमेरिका की सैन्य स्थिति भी कमजोर हो रही है। ईरान ने इस संघर्ष में न केवल सैन्य मोर्चे पर, बल्कि रणनीतिक स्तर पर भी अमेरिका को नुकसान पहुंचाया है। जानें इस संघर्ष के प्रभाव और शांति वार्ता की स्थिति के बारे में।
 

अमेरिका और इजरायल का सैन्य अभियान


अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ जो सैन्य अभियान शुरू किया था, वह अब उनके लिए एक बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। अमेरिकी कांग्रेस की हालिया रिपोर्ट ने इस अभियान के दौरान हुए नुकसान का खुलासा किया है, जिसमें बताया गया है कि ईरान के खिलाफ 40 दिन की सैन्य कार्रवाई में अमेरिका के 42 सैन्य विमान या तो नष्ट हो गए या गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हुए।


यह आंकड़ा केवल सैन्य नुकसान का नहीं है, बल्कि यह अमेरिका की सैन्य शक्ति पर भी सवाल उठाता है। रिपोर्ट के अनुसार, इस संघर्ष में चार एफ-15 ई स्ट्राइक ईगल, एक एफ-35 ए, एक ए-10 हमला विमान, सात केसी-135 ईंधन विमान, एक ई-3 चेतावनी विमान, दो एमसी-130 जे विशेष अभियान विमान, एक एचएच-60 डब्ल्यू बचाव हेलीकाप्टर, चौबीस एमक्यू-9 रीपर ड्रोन और एक एमक्यू-4 सी ट्राइटन ड्रोन को नुकसान पहुंचा है।


ऑपरेशन एपिक फ्यूरी का प्रभाव

यह सैन्य अभियान 28 फरवरी 2026 को इजरायल के सहयोग से 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' के तहत शुरू किया गया था। अमेरिका ने सोचा था कि ईरान को जल्दी ही पराजित कर देगा, लेकिन स्थिति इसके विपरीत हो गई। पूरे पश्चिम एशिया में संघर्ष भड़क उठा, और अप्रैल में संघर्ष विराम के बाद भी तनाव बना रहा।


अमेरिका की तकनीकी श्रेष्ठता को भी इस संघर्ष में बड़ा झटका लगा है। ईरान के विदेश मंत्री ने दावा किया है कि उनकी सेना ने एफ-35 लड़ाकू विमान को मार गिराया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि युद्ध फिर से शुरू होता है, तो और भी बड़े परिणाम सामने आ सकते हैं।


आर्थिक बोझ और सैन्य स्थिति

अमेरिका के लिए इस युद्ध का आर्थिक बोझ भी बढ़ता जा रहा है। अमेरिकी रक्षा विभाग के नियंत्रक ने बताया कि ईरान अभियान की लागत अब 29 अरब डॉलर तक पहुंच चुकी है। यह राशि लगातार बढ़ रही है, क्योंकि नष्ट हुए विमानों और उपकरणों की मरम्मत पर भारी खर्च आ रहा है।


अमेरिकी नौसेना ने चेतावनी दी है कि यदि कांग्रेस से आपातकालीन धन नहीं मिला, तो बजट संकट उत्पन्न हो सकता है। इस संघर्ष में कम से कम पंद्रह अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है और पांच सौ से अधिक घायल हुए हैं।


ईरान की रणनीतिक स्थिति

ईरान ने इस संघर्ष में केवल सैन्य मोर्चे पर ही नहीं, बल्कि रणनीतिक स्तर पर भी अमेरिका को नुकसान पहुंचाया है। हार्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान की स्थिति अब पहले से अधिक मजबूत हो गई है। अमेरिकी विश्लेषकों का मानना है कि यदि ईरान का दबदबा बना रहा, तो अमेरिका की स्थिति कमजोर हो सकती है।


युद्ध के बाद अमेरिका की छवि भी प्रभावित हुई है। जिस देश ने खुद को वैश्विक प्रहरी बताया, वह अब अधूरे युद्ध का प्रतीक बनता दिख रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि यह हार अमेरिका की वैश्विक स्थिति पर गहरा असर डाल सकती है।


शांति वार्ता की स्थिति

हालांकि संघर्ष विराम हो चुका है, लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता ठप है। ईरान की मांग है कि सभी सैन्य कार्रवाइयां बंद हों और आर्थिक प्रतिबंध हटाए जाएं, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति इन मांगों को मानने को तैयार नहीं हैं।


इस संघर्ष ने यह साबित कर दिया है कि केवल अत्याधुनिक हथियार और बड़ा सैन्य बजट किसी देश को अजेय नहीं बना सकते। अमेरिका ने जिस गर्व के साथ 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' शुरू किया था, वही अब उसकी वैश्विक साख पर एक बड़ा सवाल बन गया है।