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ईरान का होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण: वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव

पश्चिम एशिया में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमलों के बाद, होर्मुज जलडमरूमध्य पर तनाव बढ़ गया है। ईरान ने इस मार्ग पर नियंत्रण स्थापित करने का प्रयास किया है, जिससे वैश्विक शिपिंग और ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर संकट उत्पन्न हो सकता है। ईरान का प्रस्ताव है कि सभी जहाजों को उसकी अनुमति लेनी होगी और शुल्क अदा करना होगा, जो अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून के खिलाफ है। यह स्थिति वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती बन गई है।
 

नई दिल्ली में बढ़ते तनाव के बीच


नई दिल्ली। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद पश्चिम एशिया में स्थिति ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिला कर रख दिया है। इस संकट का केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य है, जो केवल 34 किलोमीटर चौड़ा है, लेकिन इसका महत्व इतना है कि दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल इसी मार्ग से गुजरता है।

युद्ध की शुरुआत के साथ ही ईरान ने इस जलडमरूमध्य पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर के माध्यम से कई जहाजों पर हमले किए हैं, जिससे आवाजाही लगभग ठप हो गई है।

कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि एक जहाज को इस मार्ग से गुजरने के लिए भारी शुल्क चुकाना पड़ा, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

इस स्थिति ने वैश्विक शिपिंग और ऊर्जा आपूर्ति को गंभीर संकट में डाल दिया है, जिससे यह स्पष्ट हो गया है कि यह संकरा मार्ग वास्तव में वैश्विक अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा है।

ईरान ने एक प्रस्ताव पेश किया है, जिसके अनुसार होर्मुज से गुजरने वाले सभी जहाजों को उसकी अनुमति लेनी होगी और इसके लिए शुल्क अदा करना होगा। यह शुल्क जहाज के प्रकार, माल और अन्य परिस्थितियों के आधार पर निर्धारित किया जाएगा।

रिपोर्टों के अनुसार, यह शुल्क प्रति बैरल तेल पर एक डॉलर तक हो सकता है, और ईरान इस भुगतान को क्रिप्टोकरेंसी में स्वीकार करने की योजना बना रहा है।

ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने ओमान के साथ मिलकर एक व्यवस्था बनाने की बात की है, जिसमें जहाजों को इस मार्ग से गुजरने के लिए लाइसेंस और परमिट लेना होगा, हालांकि ओमान ने इस प्रस्ताव से दूरी बना ली है।

यह पहली बार है जब किसी देश ने एक प्राकृतिक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर इस तरह का आर्थिक नियंत्रण स्थापित करने का प्रयास किया है, जिससे विवाद और बढ़ गया है।

ईरान की मांग पर वैश्विक आपत्ति भी उठी है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून, जो संयुक्त राष्ट्र समुद्र विधि समझौता के तहत लागू होता है, स्पष्ट रूप से कहता है कि किसी भी देश को प्राकृतिक जलडमरूमध्यों से गुजरने वाले जहाजों से केवल पारगमन के लिए शुल्क लेने का अधिकार नहीं है। ऐसे मार्गों को अंतरराष्ट्रीय माना जाता है और सभी देशों के जहाजों को बिना रोक-टोक आवाजाही की स्वतंत्रता होती है।