ईरान का डिएगो गार्सिया पर बैलिस्टिक मिसाइल हमला: मिडिल ईस्ट से हिंद महासागर तक का खतरा
ईरान का मिसाइल हमला
अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष ने अब मिडिल ईस्ट की सीमाओं को पार करते हुए हिंद महासागर तक अपनी पहुंच बना ली है। हाल ही में, ईरान ने डिएगो गार्सिया द्वीप पर स्थित संयुक्त अमेरिका-ब्रिटेन सैन्य अड्डे पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया। यह हमला ईरान का अब तक का सबसे लंबा और महत्वाकांक्षी प्रयास माना जा रहा है। हालांकि यह हमला असफल रहा, लेकिन इसने ईरान की मिसाइल क्षमताओं का एक बड़ा खुलासा किया है, जिससे यूरोप के कई शहरों को भी खतरा उत्पन्न हो गया है। ब्रिटेन ने इस हमले को 'लापरवाह और खतरनाक' करार दिया है, जबकि अमेरिका ने यह पुष्टि की है कि कोई नुकसान नहीं हुआ।
घटना का पूरा विवरण (21 मार्च 2026)
ईरान ने दो इंटरमीडिएट-रेंज बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिनकी दूरी लगभग 3,700 से 4,000 किलोमीटर थी। डिएगो गार्सिया, जो ब्रिटिश इंडियन ओशन टेरिटरी में स्थित है, एक महत्वपूर्ण रणनीतिक द्वीप है। यहाँ अमेरिका के B-52 बॉम्बर, B-1B लैंसर, B-2 स्टेल्थ बॉम्बर, सबमरीन और युद्धपोतों का बेस है। यह स्थान होर्मुज़ स्ट्रेट और मिडिल ईस्ट से काफी दूर है, इसलिए पहले ईरान की मिसाइलों का यहाँ तक पहुँचना असंभव माना जाता था।
प्रमुख मीडिया चैनलों ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि एक मिसाइल उड़ान में विफल हो गई, जबकि दूसरी को अमेरिकी युद्धपोत ने SM-3 इंटरसेप्टर मिसाइल से रोक दिया। इस हमले में कोई हताहत नहीं हुआ और बेस पूरी तरह सुरक्षित रहा। ईरान ने इसे 'सफल परीक्षण' बताया और दावा किया कि उनकी मिसाइलों की रेंज अब 4,000 किलोमीटर से अधिक है, जिससे बर्लिन, पेरिस और रोम जैसे यूरोपीय शहर भी खतरे में आ गए हैं।
ब्रिटेन की कड़ी प्रतिक्रिया
ब्रिटिश विदेश सचिव यवेट कोपर ने ईरान के हमले की कड़ी निंदा की और इसे ब्रिटिश हितों और सहयोगियों के लिए खतरा बताया। ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की कि यह हमला उस समय हुआ जब ब्रिटेन ने अमेरिका को डिएगो गार्सिया के बेस का उपयोग करने की अनुमति दी थी। ब्रिटेन ने स्पष्ट किया कि वह युद्ध में सीधे शामिल नहीं होगा, लेकिन अमेरिका को रक्षा सहायता प्रदान करेगा।
डिएगो गार्सिया का महत्व
डिएगो गार्सिया अमेरिका का सबसे दूरस्थ और सुरक्षित बेस है, जो इंडियन ओशन में स्थित है। यहाँ से B-52 जैसे बॉम्बर ईरान पर हमले कर सकते हैं। ईरान का यह हमला पहली बार मिडिल ईस्ट से इतनी दूर लक्ष्य पर किया गया है, जिससे ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल रेंज पर सवाल उठता है। विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान ने पहले 2,000-3,000 किमी रेंज वाली मिसाइलें दिखाई थीं, लेकिन अब 4,500 किमी तक की क्षमता का दावा कर रहा है।
युद्ध का नया और खतरनाक चरण
ट्रंप की 48 घंटे की डेडलाइन के बीच, ईरान ने जवाबी हमले तेज कर दिए हैं। अमेरिका और इजराइल ईरान पर हमले कर रहे हैं, जबकि ईरान मिसाइल और ड्रोन से जवाब दे रहा है। ईरान का संदेश स्पष्ट है: 'कोई जगह सुरक्षित नहीं है'। हालांकि, असफल हमला अमेरिकी मिसाइल रक्षा प्रणाली की ताकत को दर्शाता है। वैश्विक स्तर पर, तेल की कीमतें बढ़ रही हैं और यूरोप में सुरक्षा अलर्ट जारी किया गया है।