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ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध: खुफिया रिपोर्टों में छिपे रहस्य

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष में खुफिया रिपोर्टों ने एक चिंताजनक तस्वीर पेश की है। राष्ट्रपति ट्रंप के दावों के विपरीत, ईरान के पास अभी भी एक बड़ा हिस्सा सुरक्षित है। जानें कि कैसे ईरान की सैन्य शक्ति और उसकी रणनीतियाँ अमेरिका के लिए चुनौती बन रही हैं। क्या ईरान ने अपनी सबसे घातक मिसाइलें छिपा रखी हैं? इस लेख में इन सवालों का उत्तर जानें।
 

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की स्थिति


वाशिंगटन और तेहरान के बीच चल रहे संघर्ष को लगभग एक महीना हो चुका है। इस दौरान, अमेरिका की राजनीतिक बयानबाजी और खुफिया विभाग के आकलनों में एक बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा कि ईरान के पास अब ‘बहुत कम रॉकेट’ बचे हैं। लेकिन खुफिया रिपोर्टें एक अलग और चिंताजनक तस्वीर पेश कर रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि तेहरान के पास अभी भी अपनी मिसाइलों और ड्रोन का एक बड़ा हिस्सा सुरक्षित है, जो आने वाले हफ्तों में अमेरिका के लिए चुनौती बन सकता है।

ईरान का केवल एक तिहाई मिसाइल भंडार ही नष्ट हुआ?
रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिका ने अब तक ईरान के मिसाइल स्टॉक का केवल एक तिहाई हिस्सा ही नष्ट किया है। शेष भंडार की स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं है। अनुमान है कि एक तिहाई हिस्सा या तो क्षतिग्रस्त हो चुका है या भूमिगत बंकरों में छिपा हुआ है। इसके बावजूद, ईरान के पास एक बड़ा हिस्सा अभी भी सक्रिय है।

ईरान की ड्रोन क्षमता पर भी यही स्थिति लागू होती है। केवल 33 प्रतिशत ड्रोन ही न्यूट्रलाइज किए जा सके हैं, जिसका मतलब है कि ईरान अभी भी बड़े हवाई हमले करने की क्षमता रखता है। ट्रंप ने कहा था कि ईरान की हमलावर क्षमता खत्म हो चुकी है, लेकिन उन्होंने 1 प्रतिशत खतरे को भी गंभीर बताया है।

ईरान की हमले की रेंज में वृद्धि
भारी बमबारी के बावजूद, ईरान युद्ध के मैदान में सक्रिय है। हाल ही में, तेहरान ने संयुक्त अरब अमीरात पर 15 बैलिस्टिक मिसाइलें और 11 ड्रोन दागे। यह दर्शाता है कि उसका कमांड और लॉन्च सिस्टम अभी भी कार्यशील है। सबसे चौंकाने वाली खबर यह है कि ईरान ने डिएगो गार्सिया में स्थित अमेरिका-ब्रिटेन के बेस की ओर लंबी दूरी की मिसाइलें दागी हैं। यह ईरान के बढ़ते इरादों और उसकी मारक क्षमता के विस्तार का संकेत है।

ईरान की घातक मिसाइलें कहां हैं?
युद्ध में सबसे बड़ा रहस्य यह है कि ईरान ने अपनी सबसे आधुनिक मिसाइलों का उपयोग अब तक क्यों नहीं किया है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने ‘फतेह’ सीरीज जैसी हाइपरसोनिक मिसाइलों को बचाकर रखा है। विशेषज्ञों का मानना है कि तेहरान इन हथियारों का उपयोग अंतिम विकल्प के रूप में कर रहा है।

क्या ईरान के भूमिगत किलों को भेदना संभव है?
ईरान के पास भूमिगत मिसाइल सुविधाओं का एक बड़ा नेटवर्क है। युद्ध से पहले के अनुमानों के अनुसार, ईरान के पास 2,500 से 6,000 तक मिसाइलें थीं, जिनमें से अधिकांश मजबूत भूमिगत परिसरों में रखी गई थीं। विशेषज्ञों का कहना है कि हफ्तों के हमलों के बाद भी, ईरान के पास एक दर्जन से अधिक ऐसी सुविधाएं सुरक्षित हो सकती हैं।

अमेरिकी सेना को युद्ध में भारी नुकसान
अमेरिका ने अपने सैन्य अभियान को ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ नाम दिया है। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि अभियान सही दिशा में चल रहा है। यूएस सेंट्रल कमांड ने दावा किया है कि 10,000 से अधिक ईरानी ठिकानों को निशाना बनाया गया है। हालांकि, असल में कितनी मिसाइलें खत्म हुईं, इसका कोई सटीक डेटा नहीं है।

होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान का खतरा
दुनिया की तेल सप्लाई के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य सबसे महत्वपूर्ण रास्ता है। ट्रंप ने स्वीकार किया कि अगर 99 प्रतिशत सफलता भी मिले, तो भी 1 प्रतिशत खतरा बना रहता है। यदि एक भी मिसाइल अरबों डॉलर के जहाज से टकराती है, तो यह अस्वीकार्य होगा। ईरान का छोटा सा मिसाइल भंडार भी वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित कर सकता है।