ईरान और अमेरिका के बीच तनाव: सीजफायर के बावजूद स्थिति गंभीर
सीजफायर के बावजूद तनाव बरकरार
नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के सीजफायर के बावजूद तनाव की स्थिति पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। ईरान ने इजरायल द्वारा लेबनान में की गई कार्रवाई को समझौते का उल्लंघन मानते हुए कड़ी चेतावनी दी है, यह कहते हुए कि उसकी 'उंगली अभी भी ट्रिगर पर है'।
ईरान की चेतावनी
ईरान ने स्पष्ट किया है कि सीजफायर का मतलब यह नहीं है कि युद्ध समाप्त हो गया है। देश की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने कहा है कि यदि कोई उकसाने वाली कार्रवाई होती है, तो उसका जवाब पूरी ताकत से दिया जाएगा। इस बीच, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है, जिसका वैश्विक व्यापार और तेल आपूर्ति पर प्रभाव पड़ सकता है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की संख्या सीमित
रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने यह तय किया है कि सीजफायर के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य से प्रतिदिन अधिकतम 15 जहाजों को ही गुजरने की अनुमति दी जाएगी। यह समुद्री मार्ग विश्व के सबसे महत्वपूर्ण जलमार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की आपूर्ति होती है।
शुल्क वसूली का प्रस्ताव
इसके साथ ही, ईरान और ओमान के बीच इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूलने के प्रस्ताव पर भी चर्चा चल रही है। यदि ऐसा होता है, तो यह वैश्विक व्यापार के लिए एक बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।
बातचीत और चेतावनी का मिश्रण
ईरान ने दो हफ्ते के सीजफायर को स्वीकार करते हुए कहा है कि वह शुक्रवार से इस्लामाबाद में अमेरिका के साथ बातचीत शुरू करेगा। हालांकि, उसने यह भी स्पष्ट किया कि यह कदम केवल बातचीत के लिए है, न कि युद्ध समाप्त करने के लिए।
अमेरिकी राष्ट्रपति का नरम रुख
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी अपने रुख में नरमी दिखाई है। उन्होंने कहा है कि यदि ईरान सीजफायर का पालन करता है और होर्मुज को खोलता है, तो अमेरिका हमलों को आगे नहीं बढ़ाएगा।
चीन की भूमिका
इस घटनाक्रम में चीन की भी महत्वपूर्ण भूमिका बताई जा रही है। चीन ने पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र जैसे देशों के माध्यम से ईरान को बातचीत के लिए तैयार करने में मदद की है। हालांकि, स्थिति अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं है। कुछ क्षेत्रों में मिसाइल अलर्ट की खबरें आई हैं और ईरान से जुड़े हमले भी जारी हैं, जिससे सीजफायर की मजबूती पर सवाल उठ रहे हैं।