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ईरान-इज़राइल संघर्ष पर शिया धर्मगुरु की प्रतिक्रिया

अजमेर शरीफ दरगाह के प्रमुख सैयद ज़ैनुल आबेदीन ने ईरान-इज़राइल संघर्ष को तानाशाही का कार्य बताया। उन्होंने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह वैश्विक नेताओं को अपने स्वार्थ के लिए बंधक बना रहा है। खामेनेई की हत्या के बाद, भारत में शिया मुसलमानों ने शोक मनाने और विरोध प्रदर्शन करने का निर्णय लिया। इस दौरान, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्रों ने भी खामेनेई की हत्या की निंदा की।
 

अजमेर शरीफ दरगाह के प्रमुख का बयान

सोमवार को, अजमेर शरीफ दरगाह के प्रमुख सैयद ज़ैनुल आबेदीन ने मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव की आलोचना की। उन्होंने कहा कि ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच का टकराव युद्ध नहीं है, बल्कि इसे तानाशाही का कार्य माना जाना चाहिए। उन्होंने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह अपने स्वार्थ के लिए वैश्विक नेताओं को बंधक बना रहा है। दिवंगत अयातुल्ला अली खामेनेई को न केवल ईरान का सर्वोच्च नेता, बल्कि विश्व के शिया मुसलमानों का मार्गदर्शक भी बताया।


शिया मुसलमानों का प्रदर्शन

आबेदीन ने स्पष्ट किया कि ईरान और इज़राइल के बीच की स्थिति को युद्ध नहीं कहा जा सकता, बल्कि यह तानाशाही का उदाहरण है। उन्होंने कहा कि अयातुल्ला खामेनेई केवल ईरान के नेता नहीं थे, बल्कि वे शिया मुसलमानों के लिए एक महत्वपूर्ण व्यक्तित्व थे। उनके निधन के बाद, अखिल भारतीय शिया पर्सनल लॉ बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने घोषणा की कि शोक व्यक्त करने के लिए व्यवसाय बंद रहेंगे और काले झंडे फहराए जाएंगे।


खामेनेई की हत्या का विरोध

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई 28 फरवरी को अमेरिका-इज़राइल के हमलों में मारे गए थे। मौलाना अब्बास ने कहा कि तीन दिनों तक सभी व्यवसाय बंद रहेंगे और काले झंडे घरों पर लगाए जाएंगे। शोक सभा का आयोजन भी किया जाएगा। लखनऊ में, शिया समुदाय के सदस्य छोटे इमामबाड़ा में खामेनेई को श्रद्धांजलि देने के लिए एकत्रित हुए।


अलीगढ़ में छात्रों का प्रदर्शन

सभा के दौरान, शिया धर्मगुरु मौलाना सैयद कल्बे जवाद ने कहा कि ईरान के लोग कभी नहीं झुकेंगे और इज़राइल तथा अमेरिका को पराजित होना पड़ेगा। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के छात्रों ने भी खामेनेई की हत्या के खिलाफ मोमबत्ती मार्च निकाला और उनके लिए अंतिम संस्कार की प्रार्थना की।