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ईरान-इजराइल संघर्ष में नाटो की संभावित भूमिका

ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष में नाटो की संभावित भूमिका पर चर्चा की जा रही है। नाटो के महासचिव मार्क रूटे ने इस जंग में शामिल होने के संकेत दिए हैं, जिससे वैश्विक तनाव और बढ़ सकता है। ईरान ने भी चेतावनी दी है कि यदि जमीनी आक्रमण हुआ, तो वह फारस की खाड़ी में बारूदी सुरंगें बिछा सकता है। इस स्थिति में, अमेरिका और इजराइल की रणनीतियों का क्या प्रभाव पड़ेगा, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।
 

नाटो की सक्रियता

ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध में स्थिति और भी गंभीर होती जा रही है। अब यह प्रतीत होता है कि नाटो भी इस संघर्ष में शामिल होने की तैयारी कर रहा है। यह लड़ाई अब होर्मुज जलडमरूमध्य पर केंद्रित हो गई है। नाटो के महासचिव मार्क रूटे ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान पर हमले के निर्णय का समर्थन करते हुए कहा है कि नाटो के सदस्य देशों और दक्षिण कोरिया, जापान जैसे सहयोगी मिलकर होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को फिर से शुरू करने के लिए प्रयास करेंगे। रूटे ने न्यूज़ संडे की एंकर शेरन ब्रम के साथ बातचीत में कई महत्वपूर्ण बातें साझा की हैं। उन्होंने बताया कि 22 देशों का एक समूह, जिसमें अधिकांश नाटो सदस्य हैं, जापान, कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, यूएई और बहरीन शामिल हैं, एकजुट होकर यह सुनिश्चित करने का प्रयास कर रहा है कि हारमूस जलडमरूमध्य सुरक्षित रहे और जहाजों की आवाजाही जल्द से जल्द बहाल हो सके।


तनाव की स्थिति

यह घोषणा उस समय की गई है जब तनाव अपने चरम पर है। एक ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है, वहीं दूसरी ओर, ईरान के पावर प्लांट को नष्ट करने की धमकी दी गई है। ईरान ने भी जवाब में कहा है कि वह अमेरिका द्वारा संरक्षित देशों को निशाना बनाएगा और भारी तबाही मचाएगा। इस बीच, 22 देशों का एक साथ आना यह संकेत देता है कि विश्व युद्ध 3 का खतरा बढ़ रहा है। यदि नाटो देश मिलकर हमला करते हैं, तो आगे की स्थिति क्या होगी? ईरान किस प्रकार पलटवार करेगा?


ईरान की चेतावनी

ईरान की रक्षा परिषद ने सोमवार को चेतावनी दी है कि यदि जमीनी आक्रमण हुआ, तो वह फारस की खाड़ी में समुद्र में बारूदी सुरंगें बिछा सकता है। यह बयान उस समय आया है जब तेहरान में चिंता बढ़ रही है कि अमेरिकी मरीन क्षेत्र में तैनात किए जा सकते हैं। रक्षा परिषद ने कहा, 'यदि दुश्मन ने ईरान के तटों या द्वीपों को निशाना बनाया, तो यह स्वाभाविक रूप से फारस की खाड़ी और तटीय क्षेत्रों में सभी मार्गों को बारूदी सुरंगों से भरने का कारण बनेगा।'


अमेरिका की रणनीति

इस बीच, अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य को ऊर्जा आपूर्ति के लिए फिर से खोलने की कोशिश कर रहा है, जो फारस की खाड़ी का संकरा प्रवेश द्वार है। इस मिशन को समर्थन देने के लिए अमेरिकी मरीन ईरान के द्वीपों या तटीय क्षेत्रों पर कब्जा करने के लिए उतर सकते हैं। वहीं, इजराइल ने भी संकेत दिया है कि युद्ध के दौरान जमीनी अभियान की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।