ईरान-अमेरिका वार्ता में असफलता: शांति प्रयासों को झटका
ईरान और अमेरिका के बीच हाल ही में हुई शांति वार्ता बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई है। यह वार्ता पाकिस्तान की मध्यस्थता में हुई थी और लगभग 21 घंटे तक चली। अमेरिकी उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस ने वार्ता की विफलता का कारण ईरान का कठोर रुख बताया। अमेरिका ने ईरान से अपने परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करने की मांग की, जबकि ईरान ने इन शर्तों को अनुचित बताया। वार्ता के असफल होने के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
Apr 12, 2026, 11:51 IST
शांति वार्ता का नतीजा
ईरान और अमेरिका के बीच शांति प्रयासों को एक बड़ा झटका लगा है। पाकिस्तान की मध्यस्थता में इस्लामाबाद में हुई पहली दौर की बातचीत बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई। यह मैराथन बैठक लगभग 21 घंटे तक चली, जिसके बाद अमेरिकी उप-राष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्पष्ट किया कि वार्ता सफल नहीं रही, और इसके लिए उन्होंने ईरान के कठोर रुख को जिम्मेदार ठहराया है।
वार्ता के दौरान क्या हुआ?
शनिवार को शुरू हुई यह चर्चा करीब 15 घंटे तक चली। जेडी वेंस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि लंबी चर्चा के बावजूद दोनों पक्षों के बीच मतभेद बने रहे। उन्होंने कहा, 'बुरी खबर यह है कि हम किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सके क्योंकि ईरानी प्रतिनिधिमंडल हमारी शर्तों को मानने के लिए तैयार नहीं था।'
मुख्य मुद्दे
अमेरिका की प्रमुख मांग यह है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम संवर्धन को पूरी तरह से बंद करे। ट्रंप का उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना है। दूसरी ओर, ईरान ने अमेरिका की इन शर्तों को अनुचित बताते हुए खारिज कर दिया है। ईरान का कहना है कि अमेरिका वह सब कुछ बातचीत से हासिल करना चाहता है जो वह युद्ध से नहीं जीत सका। ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह होर्मुज पर अपना नियंत्रण बनाए रखेगा और यूरेनियम संवर्धन के अधिकार को नहीं छोड़ेगा।
ईरान की शर्तें
ईरान ने अपनी शर्तों को स्पष्ट और कड़ा रखा है। ईरान की मांग है कि अमेरिका उस पर कोई हमला न करे और अपनी आक्रामकता को पूरी तरह छोड़ दे। इसके अलावा, वह होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण बनाए रखना चाहता है और यूरेनियम संवर्धन का अधिकार भी अपने पास रखना चाहता है। ईरान ने यह भी मांग की है कि अमेरिका सभी प्राथमिक और द्वितीयक प्रतिबंधों को हटाए और संयुक्त राष्ट्र व अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के प्रस्तावों को खारिज करे। इसके अलावा, ईरान ने युद्ध में हुए नुकसान के मुआवजे, क्षेत्र से अमेरिकी सैनिकों की वापसी और लेबनान समेत अन्य मोर्चों पर हमलों को तुरंत रोकने की भी मांग की है।
अमेरिका की प्रमुख मांगें
इस शांति वार्ता के दौरान अमेरिका ने ईरान के सामने अपनी तीन प्रमुख शर्तें रखी थीं। पहली और सबसे बड़ी मांग यह थी कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम संवर्धन को पूरी तरह से बंद कर दे। दूसरी शर्त के तहत अमेरिका चाहता था कि होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को 28 फरवरी से पहले की स्थिति में सामान्य किया जाए। इसके अलावा, अमेरिका ने यह भी स्पष्ट किया कि लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ इजरायल का सैन्य अभियान जारी रहेगा। इन कड़े प्रस्तावों के कारण दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बन पाई।
भविष्य की संभावनाएं
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बगाई ने कहा कि यह बातचीत 40 दिनों के युद्ध के बाद उत्पन्न अविश्वास के माहौल में हुई थी, इसलिए एक बार में समझौते की उम्मीद नहीं थी। फिलहाल होर्मुज जलडमरूमध्य बंद है और जेडी वेंस अमेरिका लौट रहे हैं। वार्ता विफल होने के बाद क्षेत्र में फिर से तनाव बढ़ने और युद्ध की आशंका गहरा गई है।