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ईडी ने बैंक धोखाधड़ी मामले में 35 करोड़ की संपत्तियां जब्त कीं

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बीएनआर इंफ्रा एंड लीजिंग और एलीट इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ बैंक धोखाधड़ी के मामले में 35.05 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की हैं। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत की गई है। जांच में पता चला है कि इन कंपनियों ने जाली दस्तावेजों के माध्यम से ऋण प्राप्त किया, जिससे बैंकों को भारी नुकसान हुआ। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और ईडी की कार्रवाई के पीछे की कहानी।
 

धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बीएनआर इंफ्रा एंड लीजिंग और एलीट इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड सहित अन्य के खिलाफ बैंक धोखाधड़ी के मामले में 35.05 करोड़ रुपये की दो संपत्तियों को जब्त किया है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत की गई है। ईडी के हैदराबाद कार्यालय ने बीरेड्डी नरसिम्हा रेड्डी और अनिल बेनीप्रसाद अग्रवाल की संपत्तियों को जब्त किया, जिसमें एक भूखंड और एक आवासीय फ्लैट शामिल हैं।


जांच की शुरुआत

ईडी ने सीबीआई, ईओडब्ल्यू, चेन्नई और सीबीआई, एसीबी, हैदराबाद द्वारा आईपीसी, 1860 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत दर्ज की गई दो एफआईआर के आधार पर पीएमएलए, 2002 के तहत अपनी जांच शुरू की।


धोखाधड़ी का विवरण

ये एफआईआर बीएनआर इंफ्रा एंड लीजिंग और एलीट इंफ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा स्टेट बैंक ऑफ इंडिया और बैंक ऑफ महाराष्ट्र से जाली दस्तावेजों के माध्यम से धोखाधड़ी से ऋण प्राप्त करने से संबंधित हैं। इस धोखाधड़ी के कारण एसबीआई को लगभग 8.20 करोड़ रुपये और बैंक ऑफ महाराष्ट्र को 26.86 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ।


संपत्तियों की स्थिति

ईडी ने बताया कि जांच में यह सामने आया है कि इन कंपनियों के प्रवर्तकों और निदेशकों ने आपराधिक साजिश के तहत ऐसी संपत्तियों को गिरवी रखकर बैंक से ऋण प्राप्त किया, जो या तो कृषि भूमि थीं जिन्हें गलत तरीके से गैर-कृषि भूमि के रूप में दर्शाया गया था या ऐसी संपत्तियां थीं जिनका स्वामित्व विवादित था।