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ईडी की छापेमारी पर ममता बनर्जी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, जिसमें आई-पीएसी पर की गई छापेमारी का मामला शामिल है। ईडी का आरोप है कि बनर्जी ने जांच में बाधा डाली और महत्वपूर्ण दस्तावेजों को जबरन हटा लिया। इस मामले में कलकत्ता उच्च न्यायालय में सुनवाई 14 जनवरी को होगी। जानें इस राजनीतिक विवाद की पूरी कहानी और इसके संभावित परिणाम।
 

सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने राजनीतिक परामर्श फर्म आई-पीएसी पर की गई छापेमारी के संबंध में सुप्रीम कोर्ट में याचिका प्रस्तुत की है। इस केंद्रीय जांच एजेंसी ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) से मामले की जांच कराने की मांग की है। यह घटनाक्रम तब सामने आया जब ईडी ने कलकत्ता उच्च न्यायालय में याचिका दायर की, जिसकी सुनवाई 14 जनवरी को होगी।


ममता बनर्जी पर आरोप

ईडी ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एजेंसी की जांच में बाधा डाली। उन्होंने कोलकाता में आई-पीएसी के निदेशक प्रतीक जैन के घर पर छापेमारी के दौरान एजेंसी के हिरासत में लिए गए दस्तावेजों को ले लिया। एजेंसी का कहना है कि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख को पुलिस का समर्थन प्राप्त था और उन्होंने वैध तलाशी अभियान में अवैध रूप से हस्तक्षेप किया।


राज्य सरकार की याचिका

केंद्रीय जांच एजेंसी ने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री ने राज्य पुलिस की मदद से ईडी अधिकारियों की वैध हिरासत से डिजिटल उपकरण और महत्वपूर्ण दस्तावेज जबरन हटा लिए। हालांकि, कलकत्ता उच्च न्यायालय ने ईडी को तत्काल राहत देने से इनकार कर दिया। पश्चिम बंगाल सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में याचिका दायर कर यह सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है कि राज्य के तर्कों को सुने बिना कोई आदेश न दिया जाए।


आई-पीएसी का बयान

इस बीच, आई-पीएसी ने ईडी की छापेमारी की कड़ी निंदा की है, यह कहते हुए कि जांच एजेंसी ने एक चिंताजनक मिसाल कायम की है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि वे पूरी तरह से सहयोग करेंगे और कानून के अनुपालन में प्रक्रिया में शामिल रहेंगे। आई-पीएसी ने अपने कार्यों में पेशेवर ईमानदारी के उच्चतम मानकों को बनाए रखने का आश्वासन दिया है।