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इस्लाम में बैठकर पेशाब करने का महत्व और हिदायतें

इस लेख में इस्लाम में पेशाब करने के सही तरीके पर चर्चा की गई है। खड़े होकर पेशाब करने के दुष्परिणामों और बैठकर पेशाब करने के महत्व को समझाया गया है। जानें कि क्यों यह आवश्यक है कि युवा मुस्लिम इस जानकारी को साझा करें ताकि वे सही तरीके से पेशाब कर सकें और अपनी आखिरत को संवार सकें।
 

इस्लाम में पेशाब करने के नियम


इस्लाम में पेशाब करते समय बैठने का आदेश दिया गया है। यदि कोई व्यक्ति खड़े होकर पेशाब करता है, तो उसे अल्लाह की लानत का सामना करना पड़ता है। इसके परिणामस्वरूप, मृत्यु के बाद उसे कब्र में कठिनाई का सामना करना पड़ता है। कई युवा मुस्लिम खड़े होकर पेशाब करते हैं, जिससे उनके कपड़ों पर मूत्र के छींटे लगते हैं और वे नापाक हो जाते हैं। इसलिए, हम यहां इस्लाम में खड़े होकर पेशाब करने के बारे में जानकारी साझा करेंगे। युवा मुस्लिम इसे अधिक से अधिक साझा करें ताकि कोई भी व्यक्ति बैठकर इस्तिंजा (istinja) करने लगे और उसकी आखिरत संवर जाए।


इस्लाम में बैठकर पेशाब करने का आदेश

इस्लाम में बैठकर पेशाब करने की सख्त हिदायत दी गई है। खड़े होकर पेशाब करना मना है। अल्लाह के रसूल ने कहा है कि जिसने खड़े होकर पेशाब किया, उसने अपने लिए कब्र के अज़ाब को वाजिब कर लिया।


हदीस में क्या लिखा है?

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया है कि


“पेशाब के छींटों से बचो जो कि आम तौर पर क़ब्र के अज़ाब की वजह बनता है”



संदर्भ – सहीह बुखारी, जिल्द 1, सफह 34


खड़े होकर पेशाब करने की मनाही का कारण

खड़े होकर पेशाब करने से जो मूत्र के छींटे मोमिन के कपड़े और शरीर पर लगते हैं, उससे वह उस समय नापाक होता है, और मृत्यु के बाद उसे कब्र में भी गंभीर अज़ाब का सामना करना पड़ता है। अल्लाह हमें बैठकर पेशाब करने की तौफीक अता फरमाएं। विशेषकर युवा मुस्लिमों के बीच यह जानकारी साझा करें।