इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
पुलिस स्टेशनों में उपकरणों की खराबी पर चिंता
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के पुलिस स्टेशनों में उपकरणों की खराबी, विशेष रूप से सीसीटीवी कैमरों और जनरेटर की अनुपस्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। अदालत ने इसे पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारियों में लापरवाही के रूप में देखा है। यह टिप्पणी एक याचिका की सुनवाई के दौरान आई, जिसमें अवैध हिरासत और बिजली की कमी जैसी समस्याओं का उल्लेख किया गया था।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
न्यायालय ने यह भी बताया कि कई पुलिस स्टेशनों में जनरेटर और सौर पैनल लंबे समय से खराब पड़े हैं, जिससे बिजली आपूर्ति में बाधा उत्पन्न हो रही है। अदालत ने कहा कि यह स्थिति न केवल अवैध हिरासत और बिजली की कमी की शिकायतों को जन्म देती है, बल्कि यह पुलिस के बुनियादी ढांचे के रखरखाव में गंभीर चूक को भी दर्शाती है।
डीजीपी को दिए गए निर्देश
इस गंभीर मुद्दे को ध्यान में रखते हुए, इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को आदेश दिया है कि वे तुरंत सुनिश्चित करें कि राज्य के सभी पुलिस स्टेशनों में जनरेटर और अन्य आवश्यक बैकअप पावर सिस्टम सही तरीके से कार्य कर रहे हों। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
एसपी से स्पष्टीकरण की मांग
इसके अलावा, हाईकोर्ट ने संबंधित क्षेत्राधिकार के पुलिस अधीक्षक (एसपी) को निर्देश दिया है कि वे अदालत में उपस्थित होकर यह स्पष्ट करें कि जिले के सभी पुलिस स्टेशनों में उपकरणों की स्थिति क्या है और उन्हें कब तक ठीक किया जाएगा। अदालत ने इस मामले में अगली सुनवाई पर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का भी आदेश दिया है।
कानून व्यवस्था पर प्रभाव
पुलिस स्टेशनों में आवश्यक उपकरणों का सही तरीके से कार्य न करना न केवल पुलिस की कार्यक्षमता को प्रभावित करता है, बल्कि यह जनता के विश्वास को भी कमजोर करता है। जब अवैध हिरासत और बिजली की कमी जैसी शिकायतें सामने आती हैं, तो यह आवश्यक हो जाता है कि पुलिस स्टेशन आधुनिक और कार्यात्मक हों। अदालत की यह कार्रवाई इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।