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इलाहाबाद हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: मदरसे का ध्वस्तीकरण आदेश रद्द

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने संतकबीरनगर में ब्रिटिश मौलाना शमसुल हुदा खान के मदरसे के ध्वस्तीकरण के आदेश को अवैध ठहराते हुए रद्द कर दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सरकारी भूमि का अधिकार केवल एसडीएम कोर्ट के पास है। मदरसा कमेटी ने प्रशासन पर बिना नोटिस के कार्रवाई करने का आरोप लगाया है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और कोर्ट के निर्णय के पीछे की कहानी।
 

हाई कोर्ट का निर्णय

संतकबीरनगर में ब्रिटिश मौलाना शमसुल हुदा खान के मदरसे पर की गई बुलडोजर कार्रवाई के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जिला प्रशासन को एक महत्वपूर्ण झटका दिया है। कोर्ट ने बस्ती मंडल के कमिश्नर और संतकबीरनगर के डीएम द्वारा जारी मदरसे के ध्वस्तीकरण और भूमि को सरकारी घोषित करने के आदेश को अवैध ठहराते हुए रद्द कर दिया।


सरकारी भूमि का अधिकार

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि किसी भूमि को सरकारी घोषित करने का अधिकार केवल एसडीएम कोर्ट के पास है। इस मामले में डीएम और मंडलायुक्त ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर आदेश जारी किए थे। हाई कोर्ट ने 14 नवंबर 2025 को डीएम द्वारा मदरसे की भूमि को स्टेट लैंड घोषित करने के आदेश को भी निरस्त कर दिया।


मदरसा कमेटी की याचिका

मदरसा कमेटी ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि प्रशासन ने बिना उचित नोटिस के मदरसे पर बुलडोजर कार्रवाई की। सुनवाई के दौरान, हाई कोर्ट ने अधिकारियों के व्यवहार पर नाराजगी व्यक्त की और ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया को प्रथम दृष्टया अवैध बताया। मदरसा कमेटी ने ध्वस्तीकरण के लिए मुआवजे और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।


ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया

खलीलाबाद गांव के निवासी अब्दुल हकीम ने 2024 में एसडीएम कोर्ट में मदरसे के अवैध निर्माण की शिकायत की थी। इसके बाद, नवंबर 2025 में एसडीएम कोर्ट ने ध्वस्तीकरण का आदेश दिया था। मदरसा कमेटी ने इस आदेश को डीएम कोर्ट में चुनौती दी, लेकिन वहां से राहत नहीं मिली। मामला बस्ती मंडलायुक्त के पास पहुंचा, जहां 25 अप्रैल 2026 को अपील खारिज कर दी गई।


बुलडोजर कार्रवाई का विवरण

इसके बाद, 25 और 26 अप्रैल को प्रशासन ने मदरसे पर बुलडोजर कार्रवाई की। लगभग 13 घंटे तक चली इस कार्रवाई में मदरसे की बाउंड्री वॉल, 10 से अधिक पिलर और कई हिस्सों को तोड़ दिया गया। अगले दिन, दो पोकलेन मशीनों और पांच बुलडोजरों के साथ कार्रवाई फिर से शुरू हुई, लेकिन तकनीकी खराबी के कारण अभियान रोकना पड़ा।


पुलिस की तैनाती

इस कार्रवाई के दौरान, 30 महिला पुलिसकर्मियों समेत लगभग 100 पुलिसकर्मी और PAC की दो कंपनियां मौके पर तैनात थीं। बाद में, 27 अप्रैल को हाई कोर्ट ने मदरसे पर आगे की कार्रवाई पर रोक लगा दी।