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इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने यूपीसीए की संपत्तियों पर दि क्रिकेट एसोसिएशन की याचिका खारिज की

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 'दि क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तर प्रदेश' द्वारा यूपीसीए की संपत्तियों के हस्तांतरण की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने यह निर्णय लिया कि यूपीसीए की संपत्तियों का स्थानांतरण पूरी तरह से वैध था और राज्य सरकार की अनुमति की आवश्यकता नहीं थी। न्यायालय ने यूपीसीए को क्रिकेट गतिविधियों से रोकने की मांग को भी निराधार बताया। इस फैसले से यूपीसीए को राहत मिली है, जबकि याचिकाकर्ता को बीसीसीआई से मान्यता नहीं मिली है।
 

इलाहाबाद उच्च न्यायालय का निर्णय

प्रयागराज, चार अगस्त: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन (यूपीसीए) को राहत देते हुए 'दि क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तर प्रदेश' द्वारा संपत्तियों, खातों और संसाधनों के हस्तांतरण की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। अदालत ने पाया कि यूपीसीए सोसाइटी की आमसभा में, जो तीन सितंबर, 2005 को हुई थी, इसके तीन में से पांच सदस्यों ने सभी संपत्तियों और कार्यों को कंपनी अधिनियम, 1956 की धारा 25 के तहत स्थापित यूपीसीए (कंपनी) में स्थानांतरित करने का निर्णय लिया था। न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की खंडपीठ ने याचिका को निराधार बताते हुए इसे खारिज कर दिया।


खंडपीठ ने कहा, “दि क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तर प्रदेश का खुद को आधिकारिक क्रिकेट निकाय के रूप में प्रस्तुत करना भ्रामक और धोखाधड़ीपूर्ण है। इस तरह के नाम का उपयोग खिलाड़ियों, आम जनता और अन्य भागीदारों के बीच भ्रम पैदा करने का प्रयास है।” अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) द्वारा उत्तर प्रदेश में मान्यता प्राप्त एकमात्र इकाई यूपीसीए है।


अदालत ने बताया कि पूर्ववर्ती सोसाइटी 'उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन' को 2005 में कानूनी रूप से भंग किया गया था और इसकी सभी संपत्तियों और देनदारियों को कंपनी अधिनियम के तहत पंजीकृत यूपीसीए को सौंपना पूरी तरह से वैध था। राज्य सरकार की अनुमति की आवश्यकता नहीं थी, क्योंकि उसने पूर्ववर्ती सोसाइटी में किसी भी वित्तीय योगदान का प्रदर्शन नहीं किया।


खंडपीठ ने यूपीसीए को क्रिकेट गतिविधियों से रोकने की मांग को भी आधारहीन बताया और यूपीसीए के खिलाफ सीबीआई जांच की मांग को खारिज कर दिया। अदालत ने बीसीसीआई के साथ यूपीसीए की संबद्धता की जांच के लिए उच्च स्तरीय समिति के गठन की मांग को भी अस्वीकार कर दिया। अदालत ने यह भी दर्ज किया कि यूपीसीए पिछले दो दशकों से बीसीसीआई का पूर्ण वोटिंग सदस्य रहा है।


यूपीसीए ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता, दि क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ उत्तर प्रदेश को बीसीसीआई से आधिकारिक मान्यता नहीं मिली है, फिर भी उसने यूपीसीए के नाम की नकल कर खुद को मान्यता प्राप्त क्रिकेट निकाय के रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है।