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इंदौर में नवविवाहिता की दहेज प्रताड़ना की दर्दनाक कहानी

इंदौर की खुशबू मिश्रा ने दहेज प्रताड़ना के खिलाफ साहसिक कदम उठाया है। शादी के छह महीने बाद पति और सास द्वारा प्रताड़ित होने के बावजूद, उसने अपनी आवाज उठाई और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। यह कहानी न केवल उसकी हिम्मत को दर्शाती है, बल्कि समाज में दहेज प्रथा के खिलाफ जागरूकता फैलाने की आवश्यकता को भी उजागर करती है। जानिए खुशबू की कहानी और उसके संघर्ष के बारे में।
 

नवविवाहिता की ज़िंदगी बनी नर्क से भी बदतर


भारत में विवाह को एक महत्वपूर्ण सामाजिक जिम्मेदारी माना जाता है, चाहे व्यक्ति की इच्छा हो या न हो। यदि किसी की शादी की उम्र हो गई है, तो परिवार के लोग अक्सर उनकी शादी करवा देते हैं। हिंदू धर्म में विवाह को एक स्थायी बंधन माना जाता है, और यदि कोई विवाह में खुश नहीं है, तो भी समाज के डर से उसे सहन करना पड़ता है। मध्यप्रदेश के इंदौर में एक नवविवाहिता की कहानी ने इस सोच को चुनौती दी है।


इंदौर के द्वारकापुरी में रहने वाली 25 वर्षीय खुशबू मिश्रा ने अपने पति सौरभ और सास रेणुका के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का मामला दर्ज कराया है। शादी के छह महीने बाद से पति ने उसके साथ मारपीट शुरू कर दी थी, और सास ने दहेज की मांग को लेकर उसे गर्म तवे से जलाया। टीआई आरएन भदौरिया के अनुसार, शादी के प्रारंभिक दिनों में सब कुछ ठीक था, लेकिन बाद में पति का किसी अन्य महिला से अफेयर होने के कारण वह खुशबू को नीचा दिखाने लगा।


खुशबू ने बताया, "शादी के केवल छह महीने में मैंने नर्क के सारे अनुभव कर लिए हैं। पति से ज्यादा क्रूरता सास ने दिखाई।"


खुशबू ने दिखाई हिम्मत

खुशबू ने आगे बताया कि उसकी सास ने उसे गर्म तवे से जलाने के बाद घर से निकाल दिया और कहा कि अपने पिता से डेढ़ लाख रुपये लेकर आओ। इस पर खुशबू अपने मायके चली गई और वहां से सीधे द्वारिकापुरी पुलिस स्टेशन पहुंची। अन्नपूर्णा पुलिस ने उसके पिता की शिकायत पर उसके ससुराल वालों के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का मामला दर्ज किया।


भारत में, खासकर हिंदू धर्म में विवाह को एक पवित्र बंधन माना जाता है, जिसमें पति को परमेश्वर मानने की सोच है। लेकिन आज के समय में महिलाओं को अपनी आवाज उठानी चाहिए और खुशबू की तरह साहस दिखाना चाहिए, ताकि दहेज के लोभी लोगों को सबक मिल सके।