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इंडोनेशिया में शक्तिशाली भूकंप से मची अफरा-तफरी, सुनामी की चेतावनी

गुरुवार की सुबह, इंडोनेशिया में एक शक्तिशाली भूकंप ने दहशत फैला दी। इसकी तीव्रता 7.4 मापी गई और इसके बाद सुनामी की चेतावनी जारी की गई। भूकंप का केंद्र समुद्र में 30 किलोमीटर की गहराई पर था, जिससे क्षेत्र में चिंता बढ़ गई है। प्रशासन और राहत एजेंसियां अलर्ट मोड में हैं। जानें इस प्राकृतिक आपदा के कारण और इससे प्रभावित लोगों की स्थिति के बारे में।
 

इंडोनेशिया में भूकंप का कहर


गुरुवार की सुबह, इंडोनेशिया में एक शक्तिशाली भूकंप ने लोगों में दहशत फैला दी। पूर्वी इंडोनेशिया के तट से दूर समुद्र में आए इस भूकंप की तीव्रता 7.4 मापी गई। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, झटके इतने तेज थे कि आसपास के क्षेत्रों में खतरे की स्थिति उत्पन्न हो गई। इस आपदा में एक व्यक्ति की जान चली गई है। भूकंप का केंद्र 1.20 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 126.35 डिग्री पूर्वी देशांतर पर स्थित था।

चीन के भूकंप नेटवर्क केंद्र ने बताया कि यह भूकंप समुद्र के अंदर लगभग 30 किलोमीटर की गहराई पर आया, जिससे इसका प्रभाव और भी बढ़ गया। नुकसान की विस्तृत जानकारी का इंतजार किया जा रहा है, लेकिन प्रशासन और राहत एजेंसियां सतर्क हैं। USGS के अनुसार, मोलुक्का सागर में आए इस भूकंप ने पूरे क्षेत्र में चिंता का माहौल बना दिया है। प्रारंभ में इसकी तीव्रता 7.8 मापी गई, जो स्थानीय समय के अनुसार सुबह करीब 6:48 बजे दर्ज की गई। भूकंप के तुरंत बाद, हवाई स्थित पैसिफिक सुनामी वार्निंग सेंटर ने अलर्ट जारी किया।

यूजीसी ने जारी की चेतावनी
जारी की गई चेतावनी में कहा गया कि भूकंप के केंद्र से लगभग 1,000 किलोमीटर के दायरे में खतरनाक सुनामी लहरें उठ सकती हैं। विशेष रूप से इंडोनेशिया, फिलीपींस और मलेशिया के तटीय क्षेत्रों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। USGS ने भी इसी तरह की चेतावनी जारी करते हुए कहा कि केंद्र के आसपास के क्षेत्रों में समुद्र का स्तर अचानक बढ़ सकता है और तेज लहरें तटों पर असर डाल सकती हैं। प्रभावित देशों में एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं और लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है।

इंडोनेशिया में भूकंपों की अधिकता
इंडोनेशिया को दुनिया के सबसे अधिक भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में गिना जाता है, और इसका मुख्य कारण इसकी भौगोलिक स्थिति है। यह देश प्रशांत महासागर के उस खतरनाक क्षेत्र में स्थित है जिसे ‘प्रशांत अग्नि वलय’ कहा जाता है। यह क्षेत्र लगभग 40,000 किलोमीटर लंबा है और ज्वालामुखियों तथा सक्रिय भ्रंश रेखाओं से भरा हुआ है, जो टेक्टोनिक प्लेटों की निरंतर टकराहट और हलचल से बना है। यह अग्नि वलय घोड़े की नाल के आकार में प्रशांत महासागर को चारों ओर से घेरता है, जिससे यहां भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट आम बात हैं।

भूकंप से प्रभावित लोग
दुनिया में आने वाले लगभग 90 प्रतिशत भूकंप इसी क्षेत्र में दर्ज किए जाते हैं। यही कारण है कि इंडोनेशिया में जमीन के नीचे होने वाली हलचल कभी भी बड़े प्राकृतिक खतरे का रूप ले सकती है। पिछले महीने 3 मार्च को इंडोनेशिया के सुमात्रा तट के पास समुद्र में आए भूकंप ने भी लोगों को दहशत में डाल दिया था। USGS के अनुसार, इसकी तीव्रता 6.1 मापी गई, जबकि इंडोनेशिया की मौसम विज्ञान, जलवायु विज्ञान और भूभौतिकी एजेंसी ने इसे 6.4 बताया। यह भूकंप सुमात्रा के उत्तर-पूर्वी सिरे के पास समुद्र के भीतर, लगभग 13 किलोमीटर की गहराई में आया था। झटके महसूस होते ही इलाके में अफरा-तफरी मच गई। भूकंप के आदी इस क्षेत्र के लोग डर के मारे अपने घरों से बाहर निकल आए।