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आरबीआई की 50,000 करोड़ रुपये की वीआरआर नीलामी: कैश प्रबंधन की नई पहल

भारतीय रिजर्व बैंक ने 50,000 करोड़ रुपये की दो दिवसीय परिवर्तनीय रेपो दर (वीआरआर) नीलामी की घोषणा की है, जिसका उद्देश्य बैंकों में अल्पकालिक नकदी की उपलब्धता बढ़ाना है। इस नीलामी के माध्यम से, आरबीआई मौद्रिक नीति के तहत तरलता प्रबंधन को सुनिश्चित करेगा। वर्तमान में बैंकों में नकदी अधिशेष में कमी आई है, और हालिया नीलामी में मांग में नरमी देखी गई है। जानें कि VRR कैसे काम करता है और यह मौद्रिक नीति में कैसे योगदान देता है।
 

आरबीआई की नई नीलामी योजना

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने आज, तीन जून से 50,000 करोड़ रुपये की दो दिवसीय परिवर्तनीय रेपो दर (वीआरआर) नीलामी का आयोजन करने की घोषणा की है। यह नीलामी बैंकों में अल्पकालिक नकदी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए एक मौद्रिक नीति उपाय है। वीआरआर में ब्याज दर नीलामी प्रक्रिया के माध्यम से निर्धारित की जाती है, जो बैंकों को राशि के लिए बोली लगाने की अनुमति देती है। नीलामी का समय सुबह 9:30 से 10 बजे के बीच निर्धारित किया गया है, और कोष की वापसी पांच जून को होगी.


कैश स्थिति का आकलन

आरबीआई ने बताया कि वर्तमान नकदी स्थिति की समीक्षा के बाद यह निर्णय लिया गया है। एक जून तक बैंकों में नकदी अधिशेष लगभग 85,411.44 करोड़ रुपये होने का अनुमान है, जो 31 मई को 1.40 लाख करोड़ रुपये के अधिशेष से कम है। हालांकि, हाल ही में आयोजित वीआरआर नीलामी में बैंकों की मांग में कमी देखी गई, जहां 75,000 करोड़ रुपये की अधिसूचना के मुकाबले केवल 17,445 करोड़ रुपये की बोलियां प्राप्त हुईं।


वेरिएबल रेपो रेट (VRR) की समझ

वेरिएबल रेपो रेट (VRR) एक मौद्रिक नीति उपकरण है, जिसका उपयोग आरबीआई बैंकिंग प्रणाली में तरलता प्रबंधन के लिए करता है। यह फिक्स्ड रेपो रेट के विपरीत है, जो पहले से निर्धारित होता है। VRR का निर्धारण बाजार आधारित नीलामी के माध्यम से किया जाता है, जिससे बैंकों को फंड्स के लिए बोली लगाने की स्वतंत्रता मिलती है।


मौद्रिक नीति में VRR की भूमिका

VRR, तरलता को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जब महंगाई बढ़ती है, तो आरबीआई अतिरिक्त फंड वापस लेने के लिए VRR नीलामी का उपयोग करता है, जिससे महंगाई को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। इसके विपरीत, जब तरलता की कमी होती है, तो आरबीआई VRR को कम कर सकता है या अधिक फंड डालने के लिए नीलामी की आवृत्ति बढ़ा सकता है।


VRR का महत्व

VRR को समायोजित करके, आरबीआई वित्तीय बाजार को स्थिर रखने और निरंतर आर्थिक विकास को बनाए रखने में मदद करता है। रेपो रेट वह दर है जिस पर बैंक अपनी छोटी अवधि की जरूरतों के लिए आरबीआई से उधार लेते हैं। VRR, बाजार की स्थितियों के अनुसार एक लचीला विकल्प प्रदान करके रेपो रेट का पूरक बनता है.