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आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत का प्रौद्योगिकी पर महत्वपूर्ण संदेश

आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत ने प्रौद्योगिकी के उपयोग को समाज के कल्याण के लिए आवश्यक बताया, लेकिन चेतावनी दी कि लोग इसके प्रति गुलाम नहीं बनें। उन्होंने व्यापार और उद्योग की सामाजिक जिम्मेदारी पर जोर दिया और कहा कि तकनीक को भारत की सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार ढाला जाना चाहिए। भागवत ने कृषि के संदर्भ में किसानों की सोच को भी सराहा, जो खेती को केवल पेशा नहीं, बल्कि कर्तव्य मानते हैं।
 

प्रौद्योगिकी का समाज में उपयोग

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के नेता मोहन भागवत ने शनिवार को कहा कि तकनीक का उपयोग समाज के लाभ के लिए होना चाहिए, लेकिन लोगों को इसके प्रति गुलाम नहीं बनना चाहिए।


युवा उद्यमियों के साथ बातचीत के दौरान भागवत ने यह स्पष्ट किया कि स्वदेशी का उपयोग करने का अर्थ यह नहीं है कि हमें तकनीक को अस्वीकार करना चाहिए।


आरएसएस के शताब्दी वर्ष समारोह में विचार

यह संवाद आरएसएस के शताब्दी वर्ष समारोह के तहत आयोजित किया गया। उन्होंने कहा कि तकनीक आवश्यक है और इसमें कोई बुराई नहीं है, लेकिन हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हम इस पर इस हद तक निर्भर न हों कि यह हमें नियंत्रित करने लगे।


व्यापार और उद्योग की सामाजिक जिम्मेदारी

आरएसएस प्रमुख ने यह भी कहा कि व्यापार और उद्योग को केवल लाभ के लिए नहीं चलाना चाहिए। भागवत ने कहा कि हमें अपने फायदे के लिए नहीं, बल्कि समाज की भलाई के लिए काम करना चाहिए।


उन्होंने कृषि का उदाहरण देते हुए कहा कि भारतीय किसान अक्सर खेती को केवल पेशा नहीं, बल्कि अपना कर्तव्य मानते हैं।


समाज-केंद्रित दृष्टिकोण

भागवत ने कहा कि यह सकारात्मक सोच शायद ही कहीं और देखने को मिलती है। यह हमें याद दिलाता है कि हमारा कार्य समाज-केंद्रित होना चाहिए।


उन्होंने यह भी कहा कि आधुनिक तकनीक को भारत की सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों के अनुसार ढाला जाना चाहिए, और यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि तकनीक समाज को नुकसान न पहुंचाए या रोजगार के अवसरों को कम न करे।