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आरएसएस प्रमुख ने धर्मांतरण और अवैध प्रवास को जनसांख्यिकीय असंतुलन का कारण बताया

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने हाल ही में धर्मांतरण और अवैध प्रवास को जनसांख्यिकीय असंतुलन के प्रमुख कारणों के रूप में बताया। उन्होंने कहा कि सरकार अवैध प्रवास को रोकने के लिए प्रयास कर रही है, लेकिन समाज को भी अपनी भूमिका निभानी चाहिए। भागवत ने यह भी स्पष्ट किया कि नौकरियों का लाभ अवैध प्रवासियों को नहीं, बल्कि अपने नागरिकों को मिलना चाहिए। उनके विचारों में धर्म का चुनाव व्यक्तिगत अधिकार है और जबरन धर्मांतरण को रोकना आवश्यक है।
 

धर्मांतरण और अवैध प्रवास पर आरएसएस प्रमुख का बयान

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने हाल ही में जनसांख्यिकीय असंतुलन के लिए धर्मांतरण और अवैध प्रवास को मुख्य कारण बताया। उन्होंने कहा कि सरकार अवैध प्रवास को रोकने के लिए प्रयासरत है, लेकिन समाज को भी अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए। 


भागवत ने यह भी स्पष्ट किया कि नौकरियों का लाभ अवैध प्रवासियों को नहीं, बल्कि अपने नागरिकों को मिलना चाहिए, जिसमें मुस्लिम समुदाय भी शामिल है। आरएसएस के शताब्दी समारोह के दौरान एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि धर्म व्यक्तिगत पसंद का मामला है और इसमें किसी भी प्रकार का प्रलोभन या दबाव नहीं होना चाहिए।


उन्होंने कहा, धर्म का चुनाव व्यक्ति का अपना अधिकार है और जबरन धर्मांतरण को रोकना आवश्यक है। इसके अलावा, घुसपैठ एक गंभीर मुद्दा है। हर देश के पास अपने नियम और सीमित संसाधन होते हैं, इसलिए घुसपैठ को रोकना जरूरी है। सरकार इस दिशा में प्रयास कर रही है और हमारे नागरिकों को रोजगार देना प्राथमिकता होनी चाहिए।


भागवत ने कहा कि धर्मांतरण और अवैध प्रवास जनसांख्यिकीय असंतुलन के मुख्य कारण हैं। हमें अवैध प्रवासियों को नौकरी नहीं देनी चाहिए; हमें अपने लोगों को, जिसमें मुसलमान भी शामिल हैं, रोजगार प्रदान करना चाहिए।


आरएसएस प्रमुख से अवैध घुसपैठ पर संघ के विचार पूछे गए। उन्होंने कहा कि सरकार इस पर नियंत्रण पाने की कोशिश कर रही है, लेकिन समाज को भी अपनी भूमिका निभानी होगी। धर्म व्यक्तिगत पसंद का मामला है और इसमें किसी भी प्रकार का प्रलोभन या दबाव नहीं होना चाहिए।


उन्होंने यह भी कहा कि हर देश के अपने नियम और कानून होते हैं। दुनिया एक परिवार है, लेकिन हर जगह के अपने मानक होते हैं। स्वतंत्रता अनुशासन भी है... देश में अवैध प्रवासियों को अनुमति न देना वसुधैव कुटुम्बकम की अवधारणा के खिलाफ नहीं है।