आम आदमी पार्टी में सियासी संकट: राघव चड्ढा और 7 सांसदों का भाजपा में विलय
सियासी तूफान का आगाज़
नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी (AAP) में 2 अप्रैल 2026 से शुरू हुआ राजनीतिक संकट अब एक गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। पार्टी के पूर्व डिप्टी लीडर राघव चड्ढा और उनके साथ 7 सांसदों ने पार्टी छोड़ने का निर्णय लिया है। इस घोषणा के लिए चड्ढा ने संदीप पाठक और अशोक मित्तल के साथ एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया।
राघव चड्ढा की चुप्पी और पार्टी की कार्रवाई
राघव चड्ढा को 2 अप्रैल को पार्टी से हटाए जाने के बाद से ही अटकलें लगाई जा रही थीं कि कुछ बड़ा होने वाला है। चड्ढा ने कहा था कि हर झूठ का पर्दाफाश होगा और उन्होंने पार्टी को खुली चुनौती दी थी।
आंतरिक विवाद और चड्ढा का जवाब
चड्ढा ने सोशल मीडिया पर आरोपों को झूठा करार दिया और कहा कि उन्होंने हमेशा जनता के मुद्दों को उठाया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे संसद में हंगामा करने के लिए नहीं, बल्कि महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करने के लिए जाते हैं।
22 दिनों में बड़ा बदलाव
22 दिनों के भीतर, चड्ढा ने पार्टी में टूट की योजना बनाई। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि वे और उनके साथी सांसद भाजपा में शामिल हो रहे हैं। चड्ढा ने दावा किया कि राज्यसभा में पार्टी के 10 सांसद हैं और उनमें से अधिकांश उनके साथ हैं।
स्वाति मालीवाल की संभावित भूमिका
इस राजनीतिक संकट ने भारतीय राजनीति में हलचल मचा दी है। स्वाति मालीवाल की भूमिका भी इस विद्रोह में महत्वपूर्ण हो सकती है, क्योंकि उन्होंने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ आवाज उठाई है।