आम आदमी पार्टी ने राघव चड्ढा को उपनेता पद से हटाने की मांग की
आम आदमी पार्टी ने सांसद राघव चड्ढा को राज्यसभा में उपनेता पद से हटाने की मांग की है, जिससे राजनीतिक हलचल मच गई है। चड्ढा, जो जनहित के मुद्दों को उठाने के लिए जाने जाते हैं, ने कई महत्वपूर्ण विषयों पर अपनी आवाज उठाई है। उनके और पार्टी के बीच बढ़ती दूरियों के कारण यह कदम उठाया गया है। जानें चड्ढा का राजनीतिक सफर और इस प्रस्ताव के पीछे की संभावित वजहें।
Apr 2, 2026, 17:50 IST
राघव चड्ढा पर आम आदमी पार्टी की बड़ी कार्रवाई
आम आदमी पार्टी के सांसद राघव चड्ढा, जो जनहित के मुद्दों को संसद में उठाने के लिए जाने जाते हैं, पर उनकी पार्टी ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। पहले से ही संकेत मिल रहे थे कि चड्ढा और पार्टी के बीच संबंधों में खटास आ रही है, और अब राज्यसभा सचिवालय को भेजे गए पत्र ने राजनीतिक हलचल पैदा कर दी है। इस पत्र में आम आदमी पार्टी ने चड्ढा को उच्च सदन में उपनेता के पद से हटाने की मांग की है। इसके साथ ही, पार्टी ने यह भी स्पष्ट किया है कि उन्हें राज्यसभा में बोलने का समय नहीं दिया जाए। पार्टी ने अशोक मित्तल को नया उपनेता बनाने का प्रस्ताव भी दिया है और सचिवालय से इस नियुक्ति को जल्द से जल्द औपचारिक रूप देने का अनुरोध किया है.
राघव चड्ढा का राजनीतिक सफर
वर्तमान में आम आदमी पार्टी के राज्यसभा में कुल दस सदस्य हैं, जिनमें से सात पंजाब से और तीन दिल्ली से हैं। राघव चड्ढा का राजनीतिक सफर काफी तेज और प्रभावशाली रहा है। उन्होंने 2012 में अरविंद केजरीवाल के साथ दिल्ली लोकपाल विधेयक पर काम करना शुरू किया। इसके बाद, वह पार्टी के प्रमुख चेहरों में शामिल हो गए। 2015 में दिल्ली विधानसभा चुनाव में पार्टी की जीत के बाद उन्हें राष्ट्रीय प्रवक्ता बनाया गया और सबसे कम उम्र के कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी भी सौंपी गई.
चुनावों में राघव चड्ढा की यात्रा
2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने दक्षिणी दिल्ली से चुनाव लड़ा, लेकिन हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद, 2020 में दिल्ली विधानसभा चुनाव में राजेंद्र नगर सीट से जीत हासिल की। उन्हें दिल्ली जल बोर्ड का उपाध्यक्ष भी बनाया गया। 2022 में, चड्ढा राज्यसभा के सबसे युवा सदस्य बने और पार्टी के संसदीय कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाई। 2023 में, उन्हें राज्यसभा में पार्टी का नेता बनाया गया, जहां उन्होंने संजय सिंह की जगह ली.
महिलाओं के मुद्दों पर राघव चड्ढा की सक्रियता
संसद में चड्ढा ने कई महत्वपूर्ण मुद्दों को उठाया है। हाल ही में, उन्होंने पंचायतों में महिलाओं की स्थिति पर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए आरक्षित सीटों पर चुनी गई महिलाएं अक्सर केवल नाममात्र की प्रतिनिधि बनकर रह जाती हैं। इसके अलावा, उन्होंने मासिक धर्म स्वच्छता के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया, जो देश की करोड़ों महिलाओं को प्रभावित करता है.
गिग श्रमिकों के मुद्दों पर चड्ढा की पहल
इस वर्ष की शुरुआत में, उन्होंने गिग श्रमिकों की समस्याओं को समझने के लिए एक दिन डिलीवरी पार्टनर के रूप में काम किया। इस अनुभव ने उनकी संवेदनशीलता और जमीनी जुड़ाव को दर्शाया.
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
राघव चड्ढा को उपनेता पद से हटाने का प्रस्ताव कई सवाल खड़े करता है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम पार्टी के अंदर नई रणनीति और नेतृत्व संरचना को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया है। कुछ लोग इसे आंतरिक मतभेदों के रूप में भी देख रहे हैं, यह माना जा रहा है कि चड्ढा के संबंध पार्टी प्रमुख अरविंद केजरीवाल से अच्छे नहीं हैं.
भविष्य की संभावनाएं
आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि राज्यसभा सचिवालय इस प्रस्ताव पर क्या निर्णय लेता है और आम आदमी पार्टी अपने इस बदलाव के जरिए संसद में अपनी भूमिका को किस तरह नया आकार देती है.