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आजम खान ने सुप्रीम कोर्ट में गिरफ्तारी को चुनौती दी

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक नए मामले में अपनी गिरफ्तारी को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। उन्होंने अदालत से जल्द सुनवाई की मांग की है। 29 अक्टूबर को उनकी गिरफ्तारी हुई थी, और इसके बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया। अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट की प्रस्तावित सुनवाई पर टिकी हैं, जहां उनकी गिरफ्तारी और हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई होगी।
 

सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर


समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री मोहम्मद आजम खान ने मनी लॉन्ड्रिंग के एक नए मामले में अपनी गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। सोमवार (2 नवंबर) को, उच्चतम न्यायालय ने उनकी याचिका पर जल्द सुनवाई की मांग पर विचार करते हुए इसे इसी सप्ताह सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई। आजम खान के वकील निजाम पाशा ने अदालत में तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया था।


गिरफ्तारी के बाद की स्थिति

आजम खान की गिरफ्तारी का मामला 29 अक्टूबर का है। उन्हें उत्तर प्रदेश में डुअल पैन कार्ड मामले में जेल से रिहाई मिली थी, लेकिन इसके लगभग 40 मिनट बाद ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उन्हें एक नए मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार कर लिया। यह मामला रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय और उससे जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच से संबंधित है।


न्यायिक हिरासत का आदेश

गिरफ्तारी के अगले दिन, रविवार को गाजियाबाद की एमपी-एमएलए विशेष अदालत ने आजम खान को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। अदालत के निर्देशानुसार, उन्हें 13 नवंबर तक न्यायिक हिरासत में रहना होगा।


सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका

आजम खान ने अपनी याचिका में ईडी की गिरफ्तारी को चुनौती दी है। इसके साथ ही, उन्होंने 1 नवंबर को विशेष अदालत द्वारा पारित आदेश को निरस्त करने की मांग की है, जिसके तहत उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। याचिका में उन्होंने तत्काल रिहाई की भी मांग की है। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने उनके वकील की दलील सुनने के बाद याचिका को इसी सप्ताह सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई।


जौहर विश्वविद्यालय से जुड़ी संपत्तियों की कुर्की

आजम खान की गिरफ्तारी से पहले, ईडी ने रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय से जुड़ी लगभग 426.46 करोड़ रुपये की संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क किया था। यह कार्रवाई मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट, आजम खान और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच के तहत की गई थी।


आगे की कानूनी स्थिति

इस मामले में विश्वविद्यालय की संपत्तियों से जुड़े वित्तीय लेनदेन और अन्य पहलुओं की जांच की जा रही है। आजम खान के लिए यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है, जब इलाहाबाद हाई कोर्ट से उन्हें और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को कुछ मामलों में अल्पकालिक राहत मिली थी। अब सभी की नजरें सुप्रीम कोर्ट की प्रस्तावित सुनवाई पर टिकी हैं। अदालत में आजम खान की गिरफ्तारी और न्यायिक हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान आगे की कानूनी स्थिति स्पष्ट हो सकती है।