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आजम खान को 2019 के विवादित बयान पर मिली सजा, दो साल की जेल

समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान को 2019 में दिए गए एक विवादास्पद बयान के लिए दो साल की जेल की सजा सुनाई गई है। यह मामला उस समय का है जब वे रामपुर सीट से चुनाव लड़ रहे थे। उनके द्वारा एक सरकारी अधिकारी के खिलाफ की गई टिप्पणी ने काफी विवाद खड़ा किया था। जानें इस मामले की पूरी जानकारी और कोर्ट के निर्णय के पीछे की कहानी।
 

आजम खान के विवादित बयान पर कोर्ट का फैसला

समाजवादी पार्टी के प्रमुख नेता आजम खान के राजनीतिक जीवन पर असर डालने वाले एक विवादास्पद बयान पर आज न्यायालय ने अपना निर्णय सुनाया है। यह बयान सरकारी अधिकारी के बारे में था, जिसमें उन्होंने कहा था, 'ये तनखइया हैं, इनसे मत डरियो...इंशा अल्लाह इनसे जूते साफ कराऊंगा।' यह बयान रामपुर से लेकर दिल्ली चुनाव आयोग तक चर्चा का विषय बना। अब, सात साल बाद, रामपुर की एमपी-एमएलए मजिस्ट्रेट कोर्ट ने 16 मई को इस मामले में अपना निर्णय सुनाया। 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान दिए गए इस विवादास्पद बयान के लिए आजम खान को दोषी ठहराया गया है। कोर्ट ने उन्हें दो साल की जेल की सजा सुनाई है और साथ ही 5 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।


क्या है 'जूते साफ कराने' वाला पूरा मामला?

यह विवाद 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान शुरू हुआ, जब आजम खान रामपुर सीट से समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार थे। चुनाव प्रचार के दौरान रामपुर के भोट क्षेत्र में एक रोड शो आयोजित किया गया था। आरोप है कि इसी रोड शो में आजम खान ने तत्कालीन जिला अधिकारी पर तीखी टिप्पणी की थी। वायरल वीडियो में उन्हें यह कहते हुए सुना गया कि 'ये तनखइया हैं, इनसे मत डरियो, उन्हीं के साथ गठबंधन है जो जूते साफ करा लेती हैं, इंशा अल्लाह चुनाव बाद इनसे जूते साफ कराऊंगा।' यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गया था।