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आगरा में पति के गुप्तांग काटने के मामले में फूफा बरी, 12 साल बाद आया फैसला

आगरा में एक पति के गुप्तांग काटने के मामले में 12 साल बाद कोर्ट ने फूफा को बरी कर दिया है। इस मामले में पुलिस ने पत्नी और अन्य आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। जांच में लापरवाही और गवाहों के बयानों में विरोधाभास के चलते यह फैसला आया। जानें इस जटिल मामले की पूरी कहानी और कोर्ट के निर्णय के पीछे की वजह।
 

घटना का विवरण


आगरा में एक पेट्रोल पंप के निकट एक पति बेहोश पाया गया, जिसके गुप्तांग को काट दिया गया था। इस मामले में पुलिस ने उसकी पत्नी और फूफा सहित तीन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। हाल ही में कोर्ट ने फूफा को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।


12 साल बाद आया फैसला

भतीजी के साथ अवैध संबंधों के चलते पति के गुप्तांग काटने की घटना के 12 साल बाद, एडीजे-8 संजय के लाल ने आरोपी फूफा को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया। जांच में विवेचक की लापरवाही और गवाहों के बयानों में विरोधाभास सामने आया।


पिता की शिकायत

पिता ने थाना सैंया में तहरीर दी थी कि उनके बेटे का विवाह 50 हजार रुपये में हुआ था। विवाह के बाद से उनकी बहू के पास एक व्यक्ति आने-जाने लगा, जिसे उसने फूफा बताया। जब मामला बढ़ा, तो बहू ने बताया कि उसके फूफा के साथ अवैध संबंध हैं।


घटना का समय और स्थान

17 मई 2014 को बहू अपने पिता और फूफा के साथ घर आई। 22 मई 2014 की सुबह, पति बेहोश अवस्था में श्याम पेट्रोल पंप के पास मिला, और उसके गुप्तांग कटे हुए थे। वादी के दूसरे बेटे ने बहू को मौके से भागते हुए देखा।


जांच में लापरवाही

जांच अधिकारी ललित भाटी ने मामले में लापरवाही बरती। घटना स्थल से खून और मिट्टी का नमूना नहीं लिया गया, और पीड़ित के कपड़े भी जांच के लिए नहीं भेजे गए। इसके अलावा, चश्मदीद गवाह को अदालत में पेश नहीं किया गया।