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अहमदाबाद में हाई-टेक गिरोह का भंडाफोड़, डीपफेक वीडियो और बायोमेट्रिक्स का दुरुपयोग

अहमदाबाद में पुलिस ने एक हाई-टेक गिरोह का पर्दाफाश किया है, जिसने Google Gemini AI का उपयोग कर एक व्यापारी का डीपफेक वीडियो बनाया और आधार बायोमेट्रिक्स को बायपास किया। व्यापारी ने ओटीपी न मिलने पर पुलिस से संपर्क किया, जिसके बाद जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। गिरोह ने ई-केवाईसी के माध्यम से बैंक खाते खोलने का प्रयास किया और 25,000 रुपये का ऋण लिया। यह घटना वित्त मंत्री की एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद हुई, जिसमें साइबर सुरक्षा खतरों पर चर्चा की गई थी।
 

अहमदाबाद पुलिस ने साइबर अपराध का पर्दाफाश किया

तकनीक के विकास के साथ, अपराधी भी इसका दुरुपयोग करने में पीछे नहीं हैं। अहमदाबाद पुलिस की साइबर अपराध शाखा ने एक उन्नत गिरोह का खुलासा किया है, जिसने Google Gemini AI जैसे अत्याधुनिक उपकरणों का उपयोग कर एक व्यापारी का डीपफेक वीडियो तैयार किया और बिना ओटीपी के आधार बायोमेट्रिक्स को बायपास किया।


व्यापारी की शिकायत से खुला मामला

यह मामला तब सामने आया जब एक आयात-निर्यात व्यापारी ने देखा कि उसे दो दिनों से अपने बैंक से ओटीपी प्राप्त नहीं हो रहा है। संदेह होने पर, उसने पुलिस से संपर्क किया। जांच में पता चला कि उसके आधार से जुड़े मोबाइल नंबर को बिना ओटीपी सत्यापन के बदल दिया गया था और उसके बायोमेट्रिक डेटा में छेड़छाड़ की गई थी।


गिरोह की गतिविधियों का खुलासा

जांचकर्ताओं ने यह भी पाया कि गिरोह ने व्यापारी के नाम पर एक बैंक खाता खोला था और उससे 25,000 रुपये का ऋण लिया गया था। इसके अलावा, गिरोह ने व्यापारी के डिजीलॉकर खाते तक पहुंच प्राप्त की थी।


डीपफेक वीडियो का उपयोग

अधिकारियों के अनुसार, गिरोह ने पीड़ित के डीपफेक वीडियो बनाने के लिए Google के जेमिनी एआई टूल का इस्तेमाल किया। इस तकनीक का उपयोग आधार बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण को बायपास करने और उसके पंजीकृत मोबाइल नंबर को बदलने के लिए किया गया, जिससे सभी ओटीपी को आरोपी द्वारा नियंत्रित नंबर पर भेजा गया।


ई-केवाईसी के माध्यम से धोखाधड़ी

व्यापारी के आधार नंबर और अन्य व्यक्तिगत जानकारी का उपयोग करते हुए, गिरोह ने तीन बैंकों में खाते खोलने का प्रयास किया। वे Jio पेमेंट्स बैंक में सफल रहे, जहां से उन्होंने 25,000 रुपये का ऋण लिया।


गिरफ्तारी और जांच

गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों में से एक कॉमन सर्विस सेंटर में कार्यरत था, जिसने आधार सिस्टम और आधिकारिक किट का दुरुपयोग किया। जांचकर्ताओं ने इस धोखाधड़ी के तरीके की जटिलता पर आश्चर्य व्यक्त किया। गिरफ्तार चार व्यक्तियों की पहचान कनुभाई परमार, आशीष वानंद, मोहम्मद कैफ पटेल और दीप गुप्ता के रूप में हुई है।


वित्त मंत्री की बैठक के बाद की घटना

यह घटना वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा शीर्ष बैंक अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक के कुछ दिन बाद हुई, जिसमें चर्चा की गई थी कि कैसे तेजी से विकसित हो रहे कृत्रिम बुद्धिमत्ता उपकरण देश की बैंकिंग प्रणाली के लिए खतरा बन सकते हैं।


साइबर सुरक्षा खतरों पर चर्चा

बैठक में एंथ्रोपिक के क्लाउड माइथोस मॉडल से जुड़े संभावित साइबर सुरक्षा खतरों पर ध्यान केंद्रित किया गया, जो हाल ही में अनधिकृत पहुंच की रिपोर्ट के बाद जांच के दायरे में आया है।