अहमद फ़राज़: उर्दू शायरी के क्रांतिकारी शायर की अनमोल रचनाएँ
अहमद फ़राज़ का साहित्यिक योगदान
अहमद फ़राज़ (1931–2008) आधुनिक उर्दू शायरी के सबसे प्रसिद्ध और प्रभावशाली शायरों में से एक माने जाते हैं। उन्हें साहित्य की दुनिया में प्रेम और विद्रोह का एक अद्भुत संगम माना जाता है। जैसे मिर्ज़ा ग़ालिब और फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ को उर्दू साहित्य में उच्च स्थान प्राप्त है, उसी प्रकार फ़राज़ को भी 20वीं सदी के अंत का सबसे बड़ा शायर माना जाता है। उन्होंने प्रेम, प्रियतम की बेरुखी और दिल टूटने के अनुभवों को सरल लेकिन गहन शब्दों में व्यक्त किया। उनकी गज़लें आम जन के दिलों को छू जाती थीं। फ़राज़ केवल रोमांटिक शायर नहीं थे; उन्होंने पाकिस्तान में सैन्य तानाशाही के खिलाफ भी खुलकर लिखा। अपनी क्रांतिकारी शायरी के कारण उन्हें जेल की सजा भी भुगतनी पड़ी और कई वर्षों तक देश निकाला भी झेलना पड़ा। यहाँ हम फ़राज़ की प्रसिद्ध शायरी प्रस्तुत कर रहे हैं।
अहमद फ़राज़ के प्रसिद्ध शेर
1. लो फिर तिरे लबों पे उसी बेवफ़ा का ज़िक्र
अहमद 'फ़राज़' तुझ से कहा न बहुत हुआ
2. तेरी बातें ही सुनाने आए
दोस्त भी दिल ही दुखाने आए
3. क़ुर्बतें लाख ख़ूब-सूरत हों
दूरियों में भी दिलकशी है अभी
4. ज़िंदगी से यही गिला है मुझे
तू बहुत देर से मिला है मुझे
5. दिल को तिरी चाहत पे भरोसा भी बहुत है
और तुझ से बिछड़ जाने का डर भी नहीं जाता
6. मुद्दतें हो गईं 'फ़राज़' मगर
वो जो दीवानगी कि थी है अभी
7. क़ासिदा हम फ़क़ीर लोगों का
इक ठिकाना नहीं कि तुझ से कहें
8. इस क़दर मुसलसल थीं शिद्दतें जुदाई की
आज पहली बार उस से मैं ने बेवफ़ाई की
9. हम-सफ़र चाहिए हुजूम नहीं
इक मुसाफ़िर भी क़ाफ़िला है मुझे
10. और 'फ़राज़' चाहिएँ कितनी मोहब्बतें तुझे
माओं ने तेरे नाम पर बच्चों का नाम रख दिया
11. रात भर हंसते हुए तारों ने
उन के आरिज़ भी भिगोए होंगे