असम विधानसभा चुनावों में भाजपा के भीतर टिकट विवाद से असंतोष बढ़ा
असम में 9 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले भारतीय जनता पार्टी के भीतर टिकट बंटवारे को लेकर असंतोष बढ़ता जा रहा है। कई मौजूदा विधायकों और वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सैकिया नाराज नेताओं को मनाने की कोशिश कर रहे हैं। विवाद का मुख्य कारण कांग्रेस से आए नेताओं को प्राथमिकता देना और पुराने कार्यकर्ताओं की अनदेखी करना है। जानें इस संकट के पीछे की पूरी कहानी और नेताओं की प्रतिक्रियाएँ।
Mar 22, 2026, 18:06 IST
भाजपा में टिकट वितरण पर असंतोष
असम में 9 अप्रैल को होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले भारतीय जनता पार्टी में टिकट वितरण को लेकर असंतोष की लहर उठ गई है। कई मौजूदा विधायकों और वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, यह कहते हुए कि यदि उन्हें टिकट नहीं मिला, तो वे निर्दलीय चुनाव लड़ने पर विचार कर सकते हैं।
मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष की कोशिशें
इस संकट को सुलझाने के लिए मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा और प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सैकिया नाराज नेताओं को मनाने में जुटे हुए हैं। विवाद का मुख्य कारण कांग्रेस से आए नेताओं को प्राथमिकता देना और पुराने समर्पित कार्यकर्ताओं की अनदेखी करना बताया जा रहा है।
'कांग्रेस-भाजपा' का आरोप
दिसपुर निर्वाचन क्षेत्र में सबसे अधिक विरोध देखने को मिल रहा है। वरिष्ठ नेता जयंत दास, जो इस सीट के लिए प्रमुख दावेदार थे, ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ विद्रोह कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि भाजपा को 'कांग्रेस-भाजपा' बना दिया गया है, क्योंकि कांग्रेस से आए करीबियों को तरजीह दी जा रही है।
जयंत दास ने पार्टी छोड़ने का निर्णय लिया है और वे निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनावी मैदान में उतर सकते हैं। इसी तरह, बिहपुरिया सीट पर मौजूदा विधायक अमिया कुमार भुइंया की जगह कांग्रेस से आए भूपेन बोरा को टिकट देने से स्थानीय कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी है।
दिग्गज नेताओं की अनदेखी
भाजपा ने कई प्रमुख चेहरों के टिकट काट दिए हैं, जिनमें वरिष्ठ नेता अतुल बोरा और पूर्व मंत्री सिद्धार्थ भट्टाचार्य शामिल हैं। अतुल बोरा 1985 से राजनीति में सक्रिय हैं और दो बार भाजपा विधायक रह चुके हैं, जबकि भट्टाचार्य ने 2015 में हिमंत बिस्वा सरमा को भाजपा में लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
इसके अलावा, जोरहाट के पूर्व सांसद तपन कुमार गोगोई भी सोनारी सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ने की योजना बना रहे हैं। गुवाहाटी मध्य सीट पर पहली बार किसी हिंदी भाषी (विजय गुप्ता) को उम्मीदवार बनाए जाने से भी स्थानीय मतदाताओं के एक वर्ग में नाराजगी देखी जा रही है।