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असम में सुरक्षा और विकास में सुधार: केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान का बयान

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने असम में सुरक्षा और विकास में सुधार की सराहना की है। उन्होंने कहा कि राज्य में बुनियादी ढांचे और औद्योगिक क्षमता में महत्वपूर्ण बदलाव आए हैं। चौहान ने भाजपा की योजनाओं का जिक्र करते हुए कांग्रेस पर कई आरोप भी लगाए। जानें उनके बयान के प्रमुख बिंदु और असम के भविष्य की संभावनाएं।
 

असम में बदलाव की दिशा में कदम

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हाल ही में असम में हुए विकास कार्यों की सराहना की। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों में राज्य में सुरक्षा, बुनियादी ढांचे और औद्योगिक क्षमता में महत्वपूर्ण सुधार हुआ है। असम के दौरे के दौरान, चौहान ने यह भी उल्लेख किया कि पहले सुरक्षा चिंताओं के कारण कई क्षेत्रों में पहुंचना मुश्किल था, लेकिन अब स्थिति में काफी सुधार हुआ है।


असम चुनाव से पहले PM मोदी का बड़ा दावा


भाजपा उम्मीदवार भाबेश कलिता के समर्थन में एक जनसभा को संबोधित करते हुए, शिवराज ने कहा कि 'अरुणोदय योजना' और 'लाड़ली बहना योजना' का उद्देश्य केवल वोट हासिल करना नहीं है, बल्कि महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान करना है। उन्होंने कांग्रेस पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि वे महिलाओं के लिए ऐसा नहीं कर सके, तो उन्हें परेशानी क्यों हो रही है? उनका यह भी कहना था कि असम में कोई भी गरीब कच्चे घर में नहीं रहेगा, सभी को प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत पक्के मकान दिए जाएंगे।


नौकरियों और विकास की नई संभावनाएं

शिवराज ने चाय बागान के श्रमिकों के लिए भूमि पट्टों की कमी पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने कभी भी उन्हें भूमि का मालिक नहीं बनाया, जबकि नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने उन्हें भूमि के पट्टे दिए हैं। अब, उन्हें PMAY-G के तहत पक्के मकान भी दिए जाएंगे।


उन्होंने यह भी बताया कि असम में रोजगार के नए अवसरों की शुरुआत हो चुकी है। हिमंता बिस्वा सरमा ने 1,65,000 युवाओं को बिना किसी भेदभाव के सरकारी नौकरियां प्रदान की हैं।


कांग्रेस पर आरोप


विपक्ष पर निशाना साधते हुए, शिवराज ने कहा कि असम में कांग्रेस की कमान दो व्यक्तियों के हाथ में है, जिनमें आपसी मतभेद हैं। उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने असम के साथ कई अन्याय किए हैं, जैसे विभाजन के समय असम को पाकिस्तान के हवाले करने का प्रयास और असम आंदोलन के दौरान बच्चों पर गोलियां चलवाना।