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असम में समान नागरिक संहिता का प्रस्ताव: शादी और तलाक के कानूनों में बदलाव

असम सरकार ने समान नागरिक संहिता का प्रस्ताव पेश किया है, जो विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप के कानूनों को एक समान और सरल बनाने का लक्ष्य रखता है। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इस विधेयक को विधानसभा में पेश किया, जिसमें शादी के लिए न्यूनतम आयु और बहुविवाह पर प्रतिबंध जैसे महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं। यदि यह विधेयक पारित होता है, तो असम, उत्तराखंड और गुजरात के बाद, UCC लागू करने वाला तीसरा राज्य बन जाएगा।
 

असम में समान नागरिक संहिता का ऐतिहासिक प्रस्ताव

उत्तराखंड और गुजरात के बाद, असम अब समान नागरिक संहिता लागू करने वाला तीसरा राज्य बनने की दिशा में बढ़ रहा है। असम सरकार ने 25 मई को विधानसभा में 'यूनिफॉर्म सिविल कोड, असम, 2026 बिल' पेश किया। मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के द्वारा संसदीय कार्य मंत्री अतुल बोरा ने इस महत्वपूर्ण विधेयक को सदन में रखा। इस बिल का मुख्य उद्देश्य राज्य में विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप से संबंधित कानूनों को एक समान और सरल बनाना है.


शादी और तलाक के कानूनों का नया ढांचा

बिल में उल्लिखित उद्देश्यों में मुख्यमंत्री सरमा ने कहा, "इस विधेयक का लक्ष्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े कानूनों को एकीकृत करना और उन्हें सरल बनाना है।" उन्होंने यह भी बताया कि विवाह के लिए, यह विधेयक पुरुषों और महिलाओं के लिए क्रमशः 21 और 18 वर्ष की न्यूनतम आयु निर्धारित करता है और बहुविवाह पर प्रतिबंध लगाता है.


लिव-इन रिलेशनशिप के लिए कानूनी सुरक्षा

मुख्यमंत्री ने कहा, "यह विधेयक पहली बार लिव-इन रिलेशनशिप के लिए एक कानूनी ढांचा प्रदान करता है। रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य करके, यह कानून यह सुनिश्चित करता है कि पार्टनर्स के अधिकार और ऐसे संबंधों से उत्पन्न बच्चों के अधिकारों को औपचारिक मान्यता मिले।" हालांकि, यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह विधेयक असम में रहने वाले किसी भी अनुसूचित जनजाति पर लागू नहीं होगा.


कैबिनेट बैठक में विधेयक की मंजूरी

13 मई को गुवाहाटी में मुख्यमंत्री सरमा की दूसरी कार्यकाल की पहली कैबिनेट बैठक के बाद, यह घोषणा की गई थी कि राज्य सरकार 21 से 26 मई तक चलने वाले विधानसभा सत्र के दौरान इस कानून को पेश करेगी.


UCC के चार मुख्य विषय

मुख्यमंत्री ने बताया कि यूनिफॉर्म सिविल कोड में मुख्य रूप से चार विषय शामिल होंगे - विवाह की न्यूनतम आयु, बहुविवाह पर रोक, माता-पिता की संपत्ति में बेटियों को समान अधिकार, और लिव-इन रिलेशनशिप से जुड़े मामले।


असम का UCC बिल: एक महत्वपूर्ण कदम

यदि यह विधेयक पारित होता है, तो असम, उत्तराखंड और गुजरात के बाद, UCC बिल को लागू करने वाला तीसरा राज्य बन जाएगा। उत्तराखंड ने 2024 में UCC बिल पेश किया था, और यह भारत का पहला राज्य है जिसने संविधान में दिए गए नीति निर्देशक सिद्धांतों के अनुरूप ऐसा कानून लाने का प्रयास किया।