असम में घुसपैठ के खिलाफ सख्त रुख, विकास और सुरक्षा का नया एजेंडा
असम की राजनीति में घुसपैठ का मुद्दा
असम में बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा की सरकार का कठोर रुख राज्य की राजनीतिक धारा में महत्वपूर्ण बन चुका है। पिछले पांच वर्षों में अवैध घुसपैठ के खिलाफ ठोस कदम उठाए गए हैं, जबकि आर्थिक विकास, मजबूत कानून व्यवस्था और बुनियादी ढांचे के निर्माण ने मुख्यमंत्री को एक प्रभावशाली नेता के रूप में स्थापित किया है। भाजपा विधानसभा चुनाव से पहले एक मजबूत स्थिति में नजर आ रही है, क्योंकि असम की जनता ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वे न तो घुसपैठ को सहन करेंगे और न ही विकास की गति को धीमा होने देंगे.
मुख्यमंत्री का सख्त आदेश
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने स्पष्ट किया है कि विदेशी न्यायाधिकरण द्वारा किसी व्यक्ति को विदेशी घोषित करने के एक सप्ताह के भीतर उसे राज्य से बाहर भेजा जाएगा। उन्होंने बताया कि अब तक 2000 अवैध विदेशियों की पहचान की जा चुकी है और उन्हें वापस भेजा गया है। इसके साथ ही, जिला प्रशासन को बिना किसी समझौते के कार्रवाई करने का आदेश दिया गया है। जहां भी मामला बनता है, वहां तुरंत निष्कासन आदेश जारी किए जाएंगे.
कानून व्यवस्था में सुधार
मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि इस नीति के कारण राज्य में कानून व्यवस्था में सुधार हुआ है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, असम नए आपराधिक कानूनों के कार्यान्वयन में देश में पहले स्थान पर है। 2021 में 1.33 लाख मामले दर्ज हुए थे, जो 2025 में घटकर 43,748 रह गए हैं। आरोप पत्र दाखिल करने की दर में 81 प्रतिशत की वृद्धि हुई है और सजा की दर 6 प्रतिशत से बढ़कर 26.38 प्रतिशत तक पहुंच गई है.
बुनियादी ढांचे में प्रगति
मुख्यमंत्री ने बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में सरकार की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि ब्रह्मपुत्र नदी पर चार नए पुल निर्माणाधीन हैं और फरवरी में गुवाहाटी से उत्तर गुवाहाटी को जोड़ने वाला पुल शुरू होगा। इसके अलावा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी काजीरंगा के 32 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड कॉरिडोर की आधारशिला रखेंगे, जिसकी लागत लगभग 6957 करोड़ रुपये है.
आर्थिक विकास की गति
आर्थिक मोर्चे पर, मुख्यमंत्री ने कहा कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के अनुसार, 2020 से 2025 के बीच असम देश का सबसे तेजी से बढ़ने वाला राज्य बना है। राष्ट्रीय औसत वृद्धि 29 प्रतिशत रही, जबकि असम की वृद्धि 45 प्रतिशत दर्ज की गई। प्रति व्यक्ति आय 1.59 लाख रुपये तक पहुंच गई है और राज्य की राजस्व वृद्धि 53 प्रतिशत रही है.
घुसपैठ का मुद्दा और राजनीतिक प्रभाव
असम की राजनीति में अवैध घुसपैठ का मुद्दा नया नहीं है, लेकिन हिमंत बिस्व सरमा की सरकार का रुख हमेशा से सख्त रहा है। विदेशी न्यायाधिकरण के फैसले के एक सप्ताह के भीतर निष्कासन का ऐलान असमिया समाज में दशकों से पलते असंतोष का जवाब है। जमीन सिकुड़ने का डर, जनसांख्यिकीय बदलाव और पहचान का संकट इस मुद्दे को और भी संवेदनशील बना रहे हैं.
मुख्यमंत्री का संदेश
मुख्यमंत्री का बयान दो महत्वपूर्ण संकेत देता है। पहला, सरकार अब कानूनी प्रक्रिया को अंतिम सत्य मानते हुए किसी भी राजनीतिक दबाव को स्वीकार नहीं करेगी। दूसरा, यह संदेश बहुसंख्यक मतदाता वर्ग को है कि राज्य सरकार उनकी चिंताओं को गंभीरता से ले रही है. असम में चुनाव अब केवल विकास परियोजनाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पहचान और सुरक्षा का मुद्दा भी महत्वपूर्ण है.
भाजपा का चुनावी एजेंडा
चुनावी गणित के अनुसार, मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा का बयान भाजपा के लिए एजेंडा सेट करने वाला है। जब विकास परियोजनाओं के साथ सुरक्षा और पहचान का मुद्दा जोड़ा जाता है, तो यह स्पष्ट संदेश देता है कि असम में एक मजबूत सरकार है.