अलका लांबा को जंतर-मंतर प्रदर्शन में दोषी ठहराया गया
अलका लांबा की दोषसिद्धि
राउज़ एवेन्यू अदालत ने सोमवार को पूर्व विधायक अलका लांबा को 2024 में जंतर-मंतर पर महिला आरक्षण के विरोध प्रदर्शन से संबंधित मामलों में दोषी पाया। उन पर निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने और लोक सेवकों को उनके कर्तव्यों का पालन करने से रोकने के आरोप लगाए गए थे। इस मामले में 2024 में संसद स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्वनी पंवार ने इस मामले में दोषसिद्धि का निर्णय सुनाया। सजा पर बहस 5 जून को होगी।
अदालत की कार्यवाही
18 अप्रैल को अदालत ने अलका लांबा का बयान दर्ज किया और उनके खिलाफ आरोप तय किए। पहले ही अदालत ने आरोप पत्र का संज्ञान लेते हुए समन जारी कर दिया था। 25 फरवरी को दिल्ली उच्च न्यायालय ने अलका लांबा की एफआईआर रद्द करने की याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया। आरोप तय करने के खिलाफ उनकी पुनरीक्षण याचिका को राउज़ एवेन्यू अदालत ने 6 फरवरी को खारिज कर दिया।
विशेष न्यायाधीश का निर्णय
विशेष न्यायाधीश दिग् विनय सिंह ने पुनरीक्षण याचिका को खारिज करते हुए कहा कि विवादित आदेश में कोई स्पष्ट अवैधता या त्रुटि नहीं है। न्यायालय ने यह भी कहा कि निचली अदालत ने प्रत्यक्षदर्शियों के बयानों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की गहन जांच की है और यह निष्कर्ष निकाला है कि प्रथम दृष्टया मामला बनता है। आरोप तय करने का मानदंड संदेह से परे सबूत नहीं है, बल्कि आगे की कार्यवाही के लिए पर्याप्त आधार है।
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