अयोध्या राम मंदिर दान घोटाले की जांच में गंभीर खामियां उजागर
अयोध्या राम मंदिर में दान की चोरी और हेराफेरी की जांच कर रही SIT ने कई गंभीर खामियों का खुलासा किया है। जांच में दान की नकदी प्रबंधन, कर्मचारियों की नियुक्ति और CCTV निगरानी में लापरवाही की बात सामने आई है। SIT ने पाया कि ट्रस्ट के कुछ अधिकारी चढ़ावे के रूप में मिली कीमती वस्तुओं की इन्वेंट्री के बारे में संतोषजनक उत्तर नहीं दे पाए। जानें इस मामले में और क्या जानकारी सामने आई है और जांच की प्रगति के बारे में।
Jun 22, 2026, 13:09 IST
जांच में मिलीं खामियां
अयोध्या में राम मंदिर के दान से संबंधित कथित चोरी और हेराफेरी की जांच कर रही तीन सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) ने कई गंभीर खामियों का पता लगाया है। रिपोर्टों के अनुसार, जांच में दान की नकदी के प्रबंधन, कर्मचारियों के सत्यापन, CCTV निगरानी और ट्रस्ट ऑफिस से बैंक तक चढ़ावे के ले जाने की प्रक्रिया में लापरवाही सामने आई है। सूत्रों के अनुसार, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 13 जून को गठित SIT ने यह पाया कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) राम मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय कार्यों का प्रबंधन करता है, जिसमें चढ़ावे के नोटों को छांटना, गड्डियां बनाना और गिनने का कार्य शामिल है। इस प्रक्रिया के लिए SBI ने वाराणसी की एक निजी सुरक्षा एजेंसी के माध्यम से कर्मचारियों को नियुक्त किया था。
कर्मचारियों की नियुक्ति में गड़बड़ी
हालांकि, आरोप है कि सुरक्षा एजेंसी ने अयोध्या के स्थानीय लोगों को कैश गिनने के लिए काम पर रखा था। सूत्रों का कहना है कि इन कर्मचारियों की नियुक्ति राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े व्यक्तियों की सिफारिश पर की गई थी। SIT ने कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया और उनकी नियुक्ति में हुई कथित गड़बड़ियों की भी जांच की है। जांच में यह भी सामने आया कि राम मंदिर ट्रस्ट के एक कर्मचारी ने अपने जीजा को कैश गिनने का काम सौंपा था। इसके अलावा, SIT ने पाया कि कर्मचारियों की ड्यूटी पर आने-जाने के समय की ठीक से जांच नहीं की जाती थी, और यह सुनिश्चित करने के लिए कोई प्रभावी प्रणाली नहीं थी कि कर्मचारी परिसर में क्या ले जा रहे हैं या बाहर क्या ला रहे हैं।
CCTV निगरानी में खामियां
जांच के दौरान CCTV निगरानी की भी समीक्षा की गई। सूत्रों का दावा है कि कर्मचारी चोरी करने से पहले कैमरों के सामने खड़े हो सकते थे, जिससे निगरानी में खामियों का पता चलता है। SIT ने भक्तों द्वारा चढ़ाए गए सोने-चांदी के गहनों, कीमती पत्थरों और अन्य सामानों के रिकॉर्ड की भी जांच की। मंदिर के सूत्रों का कहना है कि जांचकर्ताओं को चढ़ावे की वस्तुओं के डॉक्यूमेंटेशन और अकाउंटिंग में गड़बड़ी मिली। कुछ ट्रस्ट अधिकारियों ने चढ़ावे के रूप में मिली कीमती वस्तुओं की इन्वेंट्री और स्टोरेज के बारे में संतोषजनक उत्तर नहीं दिए। जांच में जनवरी-फरवरी 2025 में महाकुंभ के दौरान हुई गड़बड़ियों के आरोपों की भी पड़ताल की गई है। इस दौरान मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भारी वृद्धि देखी गई थी, जिसमें रोजाना लगभग 10 लाख श्रद्धालु शामिल थे।
जांच की प्रगति
सूत्रों के अनुसार, SIT अपनी जांच के परिणामों की दैनिक जानकारी मुख्यमंत्री कार्यालय को भेज रही है और जांच से संबंधित रिकॉर्ड डिजिटल रूप में सुरक्षित रखे जा रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद अंतिम रिपोर्ट उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रस्तुत की जाएगी।