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अयोध्या राम मंदिर दान गबन की जांच में एसआईटी की रिपोर्ट उच्चतम न्यायालय को

अयोध्या के राम मंदिर में दान के कथित गबन की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) सोमवार को अपनी अंतरिम रिपोर्ट उच्चतम न्यायालय को सौंपने की योजना बना रही है। इस रिपोर्ट में दान से संबंधित वित्तीय अनियमितताओं की जांच का विवरण होगा। उच्चतम न्यायालय ने इस मामले में निष्पक्ष जांच की मांग करने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की है। एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में दान प्रबंधन प्रणाली की खामियों का खुलासा हुआ है, जिसके चलते कई आरोपियों की गिरफ्तारी भी हुई है। जानें इस मामले में आगे क्या होने वाला है।
 

एसआईटी की अंतरिम रिपोर्ट का उच्चतम न्यायालय में प्रस्तुतिकरण

अयोध्या स्थित राम मंदिर में दान के कथित गबन की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) सोमवार को अपनी अंतरिम रिपोर्ट उच्चतम न्यायालय को सौंपने की तैयारी में है। सूत्रों के अनुसार, एसआईटी राज्य सरकार से अतिरिक्त समय मांग सकती है ताकि वह श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से संबंधित वित्तीय अनियमितताओं की जांच को अंतिम रूप दे सके।


उच्चतम न्यायालय की सुनवाई और एसआईटी का गठन

यह घटनाक्रम उन याचिकाओं के बाद सामने आया है, जिनमें दान गबन की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच की मांग की गई थी। उच्चतम न्यायालय ने एसआईटी को जांच की स्थिति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। उल्लेखनीय है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को ट्रस्ट के अनुरोध पर तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था, जिसमें लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक किरण एस और विशेष सचिव (वित्त) नील रतन शामिल हैं।


प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद के घटनाक्रम

23 जून को एसआईटी द्वारा राज्य सरकार को सौंपी गई प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद कई महत्वपूर्ण घटनाएं हुईं। इस रिपोर्ट के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई, आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया गया और मंदिर के दान से निकाली गई नकदी बरामद की गई। इस मामले के चलते ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा को अपने पदों से इस्तीफा देना पड़ा।


दान प्रबंधन प्रणाली में खामियां

एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट में दान प्रबंधन प्रणाली की गंभीर खामियों का खुलासा हुआ। सीसीटीवी फुटेज के विश्लेषण से पता चला कि 27 अप्रैल से 5 जून के बीच गिनती के दौरान कर्मचारियों ने नोटों और सिक्कों को छिपाने की लगभग 70 घटनाएं कीं। रिपोर्ट में कहा गया है कि पुराने सीसीटीवी फुटेज की अनुपलब्धता के कारण गबन की पूरी तस्वीर का आकलन करना मुश्किल है, लेकिन कर्मचारियों के बैंक खातों में जमा राशि से संकेत मिलता है कि ऐसी गतिविधियां पहले भी होती रही हैं।


अंतिम रिपोर्ट और सुधारात्मक उपाय

एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट में मंदिर प्रशासन और दान की गणना प्रणाली में सुधार की सिफारिश की जा सकती है। रिपोर्ट में सुरक्षा उपायों की कमी की ओर भी इशारा किया गया है, जैसे कर्मचारियों की तलाशी न लेना और गिनती कक्ष में निजी सामान ले जाने की अनुमति होना। ट्रस्ट इस पर चर्चा करने के लिए 22 जुलाई को अयोध्या में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित करने वाला है।


सीबीआई जांच और अन्य याचिकाएं

वर्तमान में, उच्चतम न्यायालय उन याचिकाओं पर भी सुनवाई कर रहा है, जिनमें अदालत की निगरानी में सीबीआई जांच, फॉरेंसिक ऑडिट और ट्रस्ट के वित्तीय मामलों का नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) से ऑडिट कराने की मांग की गई है। इस बीच, विश्व हिंदू परिषद के नेताओं और चंपत राय के करीबी लोग इस मामले पर टिप्पणी करने से बच रहे हैं, उनका कहना है कि वे सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट जमा होने के बाद ही अपनी प्रतिक्रिया देंगे।