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अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो की भारत यात्रा: व्यापार और रक्षा सहयोग पर जोर

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो 23 से 26 मई तक भारत का दौरा करेंगे, जिसमें व्यापार, रक्षा और ऊर्जा के क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देने पर जोर दिया जाएगा। यह उनकी पहली यात्रा है, जिसमें वे कोलकाता, आगरा, जयपुर और नई दिल्ली का दौरा करेंगे। रूबियो 22 मई को स्वीडन में नाटो की बैठक में भाग लेने के बाद भारत आएंगे। इस यात्रा के दौरान, वे भारतीय अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करेंगे, जो भारत और अमेरिका के बीच संबंधों को और मजबूत करने में सहायक होंगे।
 

मार्को रूबियो की भारत यात्रा का उद्देश्य

अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रूबियो 23 से 26 मई तक भारत का दौरा करेंगे, जिसका मुख्य उद्देश्य व्यापार, रक्षा और ऊर्जा के क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देना है। यह उनकी पहली यात्रा होगी।


विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगोट ने जानकारी दी कि रूबियो कोलकाता, आगरा, जयपुर और नई दिल्ली का दौरा करेंगे।


पिगोट ने बताया कि इस यात्रा के दौरान, विदेश मंत्री भारतीय अधिकारियों के साथ बैठकों में ऊर्जा, सुरक्षा, व्यापार और रक्षा सहयोग पर चर्चा करेंगे।


रूबियो 22 मई को स्वीडन में नाटो के विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेंगे, जिसके बाद वे भारत के लिए रवाना होंगे।


मुख्य वार्ता के विषय

प्रवक्ता टॉमी पिगोट ने बताया कि भारत यात्रा के दौरान रूबियो वरिष्ठ भारतीय अधिकारियों के साथ कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करेंगे।


इन मुद्दों में शामिल हैं: सुरक्षित ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं का निर्माण और क्लीन एनर्जी, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा को मजबूत करना, और आपसी व्यापारिक बाधाओं को दूर करना।


टॉमी पिगोट ने कहा, "विदेश मंत्री रूबियो ऊर्जा, सुरक्षा, व्यापार और रक्षा सहयोग पर व्यापक चर्चा करेंगे।"


नाटो बैठक के बाद भारत की उड़ान

इस यात्रा का एक महत्वपूर्ण पहलू इसका समय और रूबियो का व्यस्त कार्यक्रम है। भारत जाने से पहले, वे 22 मई को स्वीडन में नाटो के विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेंगे।


यूरोप में सुरक्षा पर चर्चा समाप्त करने के बाद, वे सीधे भारत के लिए उड़ान भरेंगे।


उनका यह व्यस्त कार्यक्रम दर्शाता है कि वैश्विक स्तर पर वाशिंगटन की विदेश नीति में भारत का स्थान कितना महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस यात्रा से रक्षा प्रौद्योगिकियों के हस्तांतरण और नए व्यापारिक समझौतों को गति मिलेगी।