अमेरिकी उपराष्ट्रपति का पेंटागन पर हमला: ईरान के मुद्दे पर चिंता बढ़ी
अमेरिकी उपराष्ट्रपति का पेंटागन पर आरोप
ईरान के संदर्भ में आयोजित सिचुएशन रूम की बैठक में, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने रक्षा मंत्रालय पेंटागन के खिलाफ तीखा हमला किया है। वेंस ने आरोप लगाया कि पेंटागन झूठ बोल रहा है और राष्ट्रपति को सही जानकारी नहीं दे रहा है, जिससे युद्ध की स्थिति स्पष्ट नहीं हो पा रही है। यह जानकारी अटलांटिक मैगजीन के सूत्रों के हवाले से सामने आई है। बैठक में वेंस ने यह भी कहा कि हमारे पास हथियारों की कमी हो रही है, और यदि चीन या नॉर्थ कोरिया कुछ करते हैं, तो हम उनका जवाब देने में असमर्थ होंगे।
वेंस का यह स्पष्ट विरोध उस समय सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति ईरान के मामले में आगे बढ़ने का निर्णय नहीं ले पा रहे हैं।
ट्रंप की चिंता: ईरान युद्ध
ईरान युद्ध से परेशान हैं ट्रंप
एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप ईरान युद्ध से चिंतित हैं। उन्हें डर है कि अमेरिका एक लंबे संघर्ष में फंस सकता है, क्योंकि ईरान उन मुद्दों पर बातचीत नहीं करना चाहता है जिन पर ट्रंप समझौता करना चाहते हैं। ट्रंप ने अपने एक सलाहकार से कहा है कि ईरान केवल बम चलाना जानता है और उन्हें समझौते से कोई दिलचस्पी नहीं है।
1 मई को ट्रंप को ईरान युद्ध पर महत्वपूर्ण निर्णय लेना है। यदि वे युद्ध को बढ़ाने का निर्णय लेते हैं, तो उन्हें इसके लिए प्रस्ताव लाना होगा। हाल ही में ट्रंप ने कहा था कि हम वियतनाम में 18 साल तक रहे थे।
पेंटागन का विरोध: वेंस की मांग
पेंटागन का विरोध क्यों?
द अटलांटिक के अनुसार, वेंस ने कहा कि ईरान के पास अभी भी बहुत सारे हथियार हैं और वहां लड़ाई करने से कोई लाभ नहीं हो रहा है। इसके विपरीत, हमारे हथियार खत्म हो रहे हैं। वेंस ने पेंटागन से सही जानकारी देने की मांग की है। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ पेंटागन के प्रमुख हैं।
सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज ने 27 मार्च को एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें कहा गया था कि 850 टॉमहॉक मिसाइलों का उपयोग किया जा चुका है। वाशिंगटन पोस्ट ने इसके बाद एक रिपोर्ट में कहा कि लगभग 1200 मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका के पास रिजर्व में लगभग 2800 मिसाइलें हैं, जो निर्धारित लक्ष्य से 40 प्रतिशत कम हैं। हालांकि, पेंटागन का कहना है कि उसके पास हथियारों की कोई कमी नहीं है।
अब तक अमेरिका ने ईरान पर 12000 से अधिक हमले किए हैं, जिसके कारण उसके गोला-बारूद की कमी की बात कही जा रही है।